नहीं थम रहे अवैध कब्जे, दो महीने में ही निगम को मिली 30 शिकायतें

रायपुर। राजधानी की चारों दिशाओं में सरकारी और निजी जमीनों को दबाकर अवैध निर्माण के साथ कॉलोनियां तानी जा रही है। कई नामी बिल्डर तक इस खेल में शामिल हैं। लगातार हो रही कार्रवाई के बाद भी ये खेल थमता नहीं दिखता।
निगम क्षेत्र के आठों जोन में बीते दस सालों में हजारों कार्रवाई के बाद भी अवैध कब्जे के प्रकरण थमे नहीं हैं। हर साल निगम के पास हजारों शिकायतें पहुंचती हैं। परीक्षण के बाद इन पर कार्रवाईयां की जाती है। इसके बाद भी हर साल ऐसी शिकायतों का अंबार लग जाता है। नए वित्तीय वर्ष में निगम के संबंधित विभाग को अवैध कब्जे की 30 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। जोनवार मिलने वाली शिकायतों का परीक्षण किया जा रहा है। अवैध कब्जों के इस खेल में बड़े बिल्डर्स के अतिरिक्त रसूखदार लोग शामिल हैं। राजनीतिक महत्व रखने वालों के साथ व्यापारी संगठनों से जुड़े लोग भी अवैध कब्जे का खेल खेल रहे हैं। हालांकि निगम के द्वारा ऐसी शिकायतों पर लगातार कार्रवाईयां की जाती रही है पर शिकायतें कम होने का नाम नहीं लेती हैं। अवैध कब्जे तानकर कॉलोनियां खड़ी कर दी जाती है। यहां तक कि टीएनसी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग) से स्वीकृत कॉलोनियों तक में ऐसा खेल होता है। बिल्डर और कॉलोनी के नाम पर करोड़ों-अरबों लगाकर व्यवसाय करने वाले लोगों के विरुद्ध भी शिकायतों का अंबार टीएनसी और निगम के पास लंबित है। रायपुर निगम क्षेत्र के चहुंओर से ऐसी शिकायतें हैं। टाटीबंध क्षेत्र में एक रसूखदार ने लोगों की निजी जमीन ही दवाकर रख ली है। पूर्व की रमन सरकार में निगम के स्तर पर कार्रवाई करने गए कर्मचारियों के साथ उक्त रसूखदार न केवल अभद्रता की बल्कि ऐसा दबाव बनाया कि उक्त कर्मचारियों को वापस ही लौटना पड़ा। ऐसी घटनाओं का इतिहास भी निगम के साथ जुड़ा हुआ है। जमीन के धंधे में होने वाली कमाई को देखते हुए ये सारा खेल खेला जा रहा है।

शिकायतों का परीक्षण
अवैध निर्माण और अवैध कब्जों पर निगम के द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस वित्तीय वर्ष में 30 से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी है। इन शिकायतों का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण उपरांत शीघ्र ही इन पर कार्रवाई की जाएंगी।

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