प्रदेश में गहराया पेयजल संकट

रायपुर-  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरूवार को एक आपात बैठक बुलाई है। बैठक में सभी मंत्री एवं अधिकारी उपस्थित रहेंगे। यह बैठक राज्य के विभिन्न इलाकों में पेयजल संकट को देखते हुए बुलाई गई है। गर्मी बढऩे के साथ ही प्रदेश में पेयजल का संकट भी गहराता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में नल से आने वाले पानी की धार पतली हो गई है। वहीं ट्यूबवेल भी अब दमतोड़ रहे हैं। राजधानी के कई इलाकों में तो पानी टैंकरों के सहारे जलापूर्ति की जा रही है।

प्रदेश में गर्मी ने अब अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दोपहर होते ही शहर की प्रमुख सड़कें वीरान हो रही हैं। इधर गर्मी बढऩे के साथ ही प्रदेश में पेयजल का संकट भी गहराता जा रहा है।

तालाबों में अवैध निर्माण, तालाबों के पटते जाने के कारण भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। भीषण गर्मी से रायपुर की जीवन दायिनी खारून नदी का जलस्तर भी लगातार कम हो रहा है। इसके चलते शहर में जलापूर्ति अब बाधित होने लगी है।

राजधानी के टिकरापारा, मठपारा, पुरानीबस्ती, लाखेनगर, अश्वनी नगर, प्रोफेसर कॉलोनी, बोरिया, संतोषीनगर, पंडरी, सड्डू, मोवा जैसे इलाकों में इन दिनों पानी के लिए मारामारी की नौबत बन रही है। पेयजल संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग सार्वजनिक हैंडपंपों से देर रात तक पानी भरते नजर आ रहे हैं।

इधर घरों में लगे नलों से आने वाले पानी में भी कटौती की जा रही है। पानी की धार पतली हो जाने से लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है। शहर के अधिकांश तालाबों का पानी इस कदर प्रदूषित हो चुका है कि इसमें निस्तारी भी संभव नहीं है।

भू-जलस्तर गिरने से आने वाले दिनों में समस्या और बढ़ सकती है। वहीं मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की उम्मीद है। इस कारण लोग और चिंता में पड़ गए हैं। क्योंकि अच्छी बारिश नहीं होने से भू-जलस्तर भी नहीं बढ़ेगा। यानी जितने नलकूप या हैंडपंप बंद हो चुके हैं, शायद ही उबर पाएंगे।

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