डॉक्टर भगवान नहीं होता लेकिन उसे धरती के भगवान का दर्जा जरूर मिला हुआ है। इस दर्जा और सम्मान को हासिल करने के लिए डॉक्टर दिन और रात बराबर कर देते हैं। धरती के भगवान कहे जाने वाले इन डॉक्टरों के बीच पेशे को बदनाम करने के साथ ही लालच की प्रवृत्ति लिए हुए भी अनगिनत लोग हैं जिनकी वजह से डॉक्टर नाम पर भी भरोसा उठ चुका है। बावजूद इसके कुछ विरले डॉक्टर ऐसे भी हैं जिन्होंने ना केवल पेशे को संभाल कर रखा है बल्कि अपनी जिंदगी की परवाह न करते हुए लोगों के प्रति सेवा की भावना रखते हैं। इनमें राजधानी भोपाल के दो डॉक्टर जो खुद संक्रमित हैं, फिर भी कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनका कहना है- हम बैठ गए तो मरीजों को कौन संभालेगा।
डॉ. अनुराधा चौधरी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के सर्जरी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और 10 दिन से कोरोना संक्रमित हैं। वे हमीदिया अस्पताल के ए ब्लॉक के सैकंड फ्लोर पर भर्ती हैं और यहां भर्ती 20 से ज्यादा मरीजों का इलाज भी कर रही हैं। वे कहती हैं कि डॉ. देवेंद्र और डॉ. बर्डे को इलाज करते देखा तो मेरा हौसला बढ़ा। फिर तय किया कि यहां बीमार बनकर नहीं बैठना है। इसलिए अपने फ्लोर पर भर्ती 20 और दूसरे फ्लोर के मरीजों का भी इलाज कर रही हूं। जरूरत पड़ती है तो मेडिसिन के वे डॉक्टर, जो होम आइसोलेशन में हैं, उनसे फाेन पर दवा पूछकर मरीजों को दे देती हूं।
डॉ. अनुभव अग्रवाल का जीएमसी से एमडी मेडिसिन थर्ड ईयर चल रहा है। वे 16 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुए। अभी हमीदिया के एक ब्लॉक में फर्स्ट फ्लोर पर भर्ती हैं। वे बताते हैं कि जिस दिन भर्ती हुआ, उसी दिन यहां एडमिट एक मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन से रिएक्शन हुआ। मैंने जिम्मेदारी समझी और इलाज में जुट गया। भूल गया कि खुद भी मरीज हूं। इसके बाद तय किया कि जब तक भर्ती हूं, मरीजों का इलाज भी करूंगा। मैं महसूस कर रहा हूं कि इनका इलाज कर मैं खुद भी जल्दी रिकवर हो रहा हूं।