बीजापुर। बस्तर के सिलगेर में हुई हिंसा और उसमें हुई मौत के मामले में सरकार की ओर से गठित 9 सदस्यीय टीम तर्रेम के पटेल पारा पहुंची और आंदोलनरत किसानों के साथ चर्चा कर बीजापुर के लिए लौट गई। टीम की अध्यक्षता कर रहे बस्तर सांसद दीपक बैज ने ग्रामीणों से चर्चा के बाद कहा कि वार्ता सकारात्मक रही और आदिवासियों ने भी आंदोलन वापस लेने के लिए कल तक का समय मांगा है।

 

दीपक बैज ने कहा कि सिलगेर में विकास और कैंप समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई है। हम सरकार को अपनी रिपोर्ट यहां से लौटने के बाद सौंप देंगे। हमें लगता है कि जल्द आंदोलन ख़त्म होगा और सरकार भी इनकी मांगों को पूरा करेगी। सोमवार को सरकार ने बस्तर सांसद दीपक बैज की अध्यक्षता में 8 विधायकों को जाँच की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें लखेश्वर बघेल, संतराम नेताम, देवती कर्मा, शिशुपाल शोरी, अनूप नाग, विक्रम मंडावी, राजमन बेंजाम और चंदन कश्यप शामिल थे।

 

बताते चलें कि बीजापुर और सुकमा के सीमावर्ती ग्राम सिलगेर में हाल ही में सीआरपीएफ का कैंप खोला गया था। इसके विरोध में स्थानीय आदिवासी 15 मई से आंदोलन कर रहे थे। 17 मई को आदिवासी गांव से निकलकर कैंप का विरोध करने कैंप के पास पहुंचे। इस दौरान जवान और आदिवासियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। इसमें जवानों की गोलियों से तीन आदिवासियों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद कई ख़बरों में दावा यह भी किया गया था कि इस दौरान भगदड़ में एक आदिवासी महिला की भी मौत हुई थी।

 

कैंप के विरोध में सिलगेर समेत कई गांवों के आदिवासी आंदोलनरत हैं और इनकी संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। आदिवासियों ने जवानों की गोलीबारी में मारे गए तीन आदिवासियों का स्मारक भी आंदोलन स्थल पर बना दिया गया है। आदिवासियों की मांग है कि सिलगेर से कैंप को हटाया जाए और तीन लोगों की मौत के जिम्मेदार पुलिस जवानों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।आंदोलन को ख़त्म करने के लिए स्थानीय प्रशासन आदिवासियों के प्रतिनिधि मंडल से कई दौर की बातचीत की है, लेकिन यह निराधार ही निकला है।

 

मारे गए तीन आदिवासी नहीं, नक्सली हैं : आईजी

 

17 मई को हुए फायरिंग में तीन आदिवासियों की मौत की खबर पर आईजी पी. सुंदरराज ने दावा किया है कि वे नक्सली हैं और उन्होंने पहले कैंप में फायरिंग की थी। इस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए जवानों ने इन तीनों को मार गिराया था। आईजी ने तोपचंद से कहा था कि तीनों लोग नक्सली संगठन से कहीं न कहीं जुड़े हुए थे। हालांकि आईजी और पुलिस की ओर इनके नाम अभी तक नहीं बताये गए हैं। जबकि नक्सलियों ने पर्चा जारी कर मृतकों के नाम बताये थे।

 

विपक्ष समेत आदिवासियों के सामाजिक संगठनों ने भी की है जांच की मांग

 

सिलगेर में तीन आदिवासियों की मौत के बाद आदिवासी सामाजिक संगठनों, सीपीआई और आम आदमी पार्टी ने भी स्थानीय स्तर पर जाकर जांच की थी| इसके अलावा भाजपा ने भी अपनी टीम भेजकर जांच कराई है| हालांकि अभी भाजपा की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। जबकि अन्य लोगों ने मृतकों को ग्रामीण किसान बताया है। उन्होंने पाया कि तीनों आदिवासी अन्य आंदोलनकारियों को तरह कैंप के विरोध में आंदोलन कर रहे थे।

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