हौसले को सलाम: असफलताओं को मात देकर सफलता की सीढ़ी चढ़ी दुर्ग की बेटी, निवेदिता शर्मा का एयरफोर्स में चयन

दुर्ग। खंडेलवाल कॉलोनी निवासी निवेदिता शर्मा अब आसमान की ऊंचाइयों को छुएंगी और ये सब मुमकिन हुआ है उनकी लगन, कड़ी मेहनत और उनके पिता की वजह से। 21 वर्षीय निवेदिता शर्मा का एयरफोर्स में चयन हुआ है। (nivedita sharma selected in airforce) उन्हें एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के पद के लिए चयनित किया गया है। 15 जनवरी को हैदराबाद जाकर वो ट्रेनिंग सेशन में भाग लेंगी। शासकीय गर्ल्स कॉलेज में बीकॉम के दौरान ही निवेदिता को उनके पिता ने ही एनसीसी एयरविंग (NCC Airwing) ज्वाइन करने की सलाह दी। पिता हर समय यही सोचते थे कि बेटी को कॉमर्शियल पायलेट बनाएंगे तो काफी ज्यादा रकम खर्च होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनकी बेटी अपनी योग्यता के बल पर एयरफोर्स में चयनित हुई और पिता के अरमानों को भी पंख लगा दिए। अब निवेदिता शर्मा का एयरफोर्स में चयन होने से परिवार में खुशी का माहौल है।

बचपन से पायलट बनना चाहती थी निवेदिता

निवेदिता बचपन से ही पायलट बनना चाहती थी। उनके पिता अशोक शर्मा उसे हमेशा कहते थे कि वह एक दिन एयरफोर्स जरूर ज्वाइन करेगी और आसमान में उड़ने का सपना जरूर पूरा करेगी। पिता ने बेटी के सपने को अपना सपना बनाया और उसे उसी दिशा में जाने का रास्ता दिखाया।

असफलताओं से लड़कर सफल हुई निवेदिता

निवेदिता के पिता अशोक शर्मा नागरिक सहकारी बैंक दुर्ग में मैनेजर थे। रिटायर होने के बाद वह वर्तमान में कॉस्ट अकाउंटेंट की प्रैक्टिस करते हैं और आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर हैं। निवेदिता की मां गृहणी हैं। एक छोटी बहन है जो 11वीं में पढ़ती है। इससे पहले निवेदिता दो बार एयरफोर्स की परीक्षा में असफल रही। इसके बाद भी हार ना मानते हुए उन्होंने तीसरी बार परीक्षा दी और सफलता हासिल की।

वायुसेना विमान हादसा: शुरुआती जांच में सामने आई जानकारी, इस कारण क्रैश हुआ जनरल बिपिन रावत का हैलीकॉप्टर

कर्नल से मुलाकात के बाद लिया फैसला

स्कूल के दिनों में निवेदिता के पापा के दोस्त ने उनकी मुलाकात एक कर्नल से कराई थी। निवेदिता ने उनसे पायलेट बनने के बारे में पूछा तो उन्होंने उसे एयरफोर्स में जाने का रास्ता सुझाया। उसी समय से निवेदिता ने ठान लिया था कि वो एयरफोर्स में जाएगी।

15 हजार किमी उपर से लगाई थी छलांग

एयरफोर्स में जाने के लिए ही निवेदिता ने कॉलेज में एडमिशन लिया और एनसीसी एयरविंग में शामिल हुईं। यहां पहली बार पैराशूट के साथ 15 हजार किलोमीटर ऊंचाई से उसने छलांग लगाई, तब आसमान में उड़ने का उसका सपना भी पूरा हो गया। इस सपने को हमेशा के लिए साकार करने के लिए वह एयरफोर्स के अधिकारियों से मिली और उन्होंने उसे आगे का रास्ता बताया।

खुद को सेना में जाने के हिसाब से ढाला

लड़कियां नाजुक होती हैं और एयरफोर्स की ट्रेनिंग काफी सख्त। शायद यह बात निवेदिता के जेहन में बैठ गई। उसने अपने आपको पूरी तरह से एयरफोर्स के लायक बनाया। उसने कड़ी मेहनत भी की। खूब मन लगाकर पढ़ाई की और अपने शरीर को लोहा बनाया। लिखित परीक्षा पास करने के बाद वाराणसी में 5 दिन का एसएसबी इंटरव्यू पास किया।

Leave a Reply