कारगिल युद्ध में दीपचंद नायक रहे शामिल,जान की बाजी लगाकर जीता कारगिल युद्ध,प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने किया सम्मान

भारत के वीर सपूतों के जज्बे को हर कोई सलाम करता है। आज हम आपको ऐसे वीर की कहानी दिखा रहे है, जिन्होनें देश सेवा के दौरान अपना एक हाथ और दोनो पैर खो दिए, उनका नाम है नायक दीपचंद। जो छत्तीसगढ़ प्रवास पर है। इस दौरान वे रायपुर प्रेस क्लब मे पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान  उन्होने अग्निपथ योजना और सेना से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर पत्रकारों से चर्चा की।

देशवासियों के लिए 26 जुलाई का दिन गर्व से भर देने वाला है। इसी दिन कारगिल युद्ध में  देश के वीर जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर दुश्मन को सरहद से पीछे धकेल दिया था। इन्ही वीर सपूतों में नायक दीपचंद ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर कारगिल युद्ध में भाग लिया। वे कारगिल विजय दिवस में आयोजित जश्न में शामिल होने  छत्तीसगढ़ दौरे पर है। इस दौरान वे प्रेस क्लब मे पत्रकारों से रूबरू हुए। इस मौके उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सैनिकों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वह नहीं मिलती चाहे सरकार कियी की भी क्यों ना हो। यहां तक परमवीर चक्र से सम्मान्नित सैनिकों के नाम पर देश में एक भी हवाई अड्ड या अन्य बड़ी जगहों का नामकरण नहीं किया गया। कोई भी सांसद विधायक मंत्री अपने बेटे को सेना में नहीं भेजना चाहता।

रूबरू कार्यक्रम के जरिए प्रेस क्लब अध्यक्ष दामू अम्बेडारे, कोषाध्यक्ष शगुफ्ता शिरीन, कार्यकारिणी सदस्य जावेद खान, मनोज नायक पत्रकार बृजनारायण साहू समेत पत्रकारों ने गुलदस्ता देकर कारगिल योद्धा दीपचंद नायक को सम्मान्नित किया। इसके बाद प्रेस क्लब अध्यक्ष दामू अम्बेडारे ने स्मृति चिन्ह देकर उनका सम्मान किया।