World Breastfeeding Week 2022: वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक पर जानें ब्रेस्टफीडिंग से मां और बच्चे को क्या मिलता है लाभ

World Breastfeeding Week 2022: वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक (World Breastfeeding Week)हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच मनाया जाता है. ये एक वार्षिक उत्सव के रूप में 120 से अधिक देशों में आयोजित किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ब्रेस्टफीडिंग को बच्चों के स्वास्थ्य और ब्रेस्टफीडिंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ये सप्ताह मनाया जाता है. इसी के तहत आज दुर्ग जिला अस्पताल में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ जेपी मेश्राम (Dr JP Meshram)के अध्यक्षता में वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक का आयोजन किया गया. इस दौरान जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ वाई के शर्मा (Dr. YK Sharma)भी मौजूद रहे.

ब्रेस्टफीडिंग को प्रोत्साहित करने और दुनिया भर के शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है. सप्ताह भर चलने वाले इस उत्सव का इतिहास 1990 के दशक का है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन फंड (यूनिसेफ) ने ब्रेस्टफीडिंग को बढ़ावा देने और समर्थन करने के लिए इनोसेंटी घोषणा पत्र बनाया था. बाद में 1991 में, यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्टफीडिंग एक्शन नामक एक संघ का गठन किया गया था. 1992 में, इस कैंपेन को बढ़ावा देने के लिए एक पूरा सप्ताह समर्पित किया गया.

 

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ब्रेस्टफीडिंग को नर्सिंग के रूप में भी जाना जाता है. ब्रेस्टफीडिंग शिशुओं के विकास के लिए बेहद आवश्यक होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि मां का दूध शिशुओं के लिए एक संपूर्ण आहार है, जिसमें बच्चे के विकास के लिए सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में पाए जाते है. मां का दूध बच्चे के लिए किसी अमृत से कम नहीं है. इसलिए ये बच्चे के लिए वैक्सीन के रूप में काम करता है, जो उन्हें बचपन में होने वाली कई सामान्य बीमारियों से बचाता है.

इसके अलावा, यदि कोई कोविड -19 पॉजिटिव या सस्पेक्टेड महिला ब्रेस्टफीडिंग करवाना चाहती है तो वे कुछ सावधानियों का पालन करके ऐसा कर सकती है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ब्रेस्टफीडिंग कराने से पहले मां को कम से कम 20 सेकेंड तक साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए. पानी ना होने की स्थिति में, कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल की मात्रा वाले हैंड सैनिटाइजर का उपयोग किया जा सकता है. इसके अलावा, बच्चे के साथ किसी भी संपर्क में आने के दौरान और दूध पिलाते समय भी हमेशा मास्क का उपयोग करें.