दंतेवाड़ा :
नक्सल और उफनते नदी-नालों के चुनौती के बीच दंतेवाड़ा में आजादी का पर्व मनाया गया। दरअसल ये वो क्षेत्र है, जहां जोरदार बारिश के बीच शिक्षकों को इस बार अपने स्‍कूलों में तिरंगा फहराने दोहरी चुनौतियों का समाना करना पड़ा।

नक्सल और उफनती नदी के खतरे के बीच मना तिरंगा उत्सव

दंतेवाड़ा का बुरगुम और रेवाली दो ऐसे स्कूल हैं, जहां तक शिक्षकों को पहुंचने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही शिक्षकों की तस्वीर आई सामने जो तिरंगा फहरा सके। इसके लिए मलगेर नाले को पार करते देखे गए। ये क्षेत्र नक्सलियों के वर्चस्व वाला क्षेत्र है, जहां तिरंगा फहराना किसी जोखिम से कम नहीं है। नक्सली 15 अगस्त को काला दिवस मनाते हैं और शिक्षकों पर दबाव बनाते हैं। इस बार नक्सल प्रभावित बर्रेम जैसे गांवों में भी शिक्षकों ने तिरंगा फहराया।

नक्सलियों ने बुरगुम और रेवाली जाने का रास्ता बंद कर रखा है

दंतेवाड़ा की बुरगुम और रेवाली ग्राम पंचायत जाने वाली मुख्य सड़क को नक्सलियों ने पोटाली के आगे सड़क काट रखी है। दूसरा कच्चा रास्ता भी नक्सलियों ने बंद कर दिया है और इस रास्ते में मलगेर नाला पड़ता है, जो इस समय उफान पर है।