देश में रोजाना लाखों लोग ट्रेन ( train)में सफर करते हैं। आपने भी कभी ना कभी ट्रेन में सफर जरूर किया होगा, लेकिन सफर करने के दौरान आपने देखा होगा कि रेलवे ट्रैक के नीचे और उसके अगल-बगल छोटे-छोटे नोकीले पत्थर बिछे होते हैं. क्या आपने कभी यह सोचा है कि रेलवे ट्रैक पर ये पत्थर क्यों बिछे होते हैं. इन पत्थरों का रेलवे ट्रैक पर आखिर क्या काम है।

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अगर आप इन पत्‍थरों के पीछे के विज्ञान को समझना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले पटरी की बनावट को समझना होगा। ज्‍यादातर लोगों को ऐसा लगता है कि जमीन पर सीधे पटरी बिछा दी जाती हैं और पत्‍थर डाल दिए जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।पटरी दिखने में जितनी साधारण लगती है, यह उतनी सामान्‍य नहीं होती है।अगर आप इसे करीब से देखेंगे तो पाएंगे कि इसे कई लेयर के साथ तैयार किया जाता है।

क्या कहता है विज्ञान

विज्ञान कहता है कि जब ट्रेन ( tain)पटरी पर चलती है तो इसके कारण एक तरह की कम्‍पन्‍न पैदा होती है। कम्‍पन्‍न के कारण पटरी को फैलने से रोकने का काम यही नुकीले पत्‍थर करते हैं. बता दें कि अगर ये पत्‍थर गोल हो तो ये कम्‍पन्‍न नहीं रोक पाएंगे और ऐसे में पटरी फैल जाएगी। इसलिए ट्रैक पर नुकीले पत्थर बिछाए जाते हैं।

बारिश के मौसम में पानी भरता है तो ट्रैक नहीं डूबता

पटरियों पर पड़े इन पत्‍थरों के कारण ट्रैक पर कोई पौधे नहीं उग पाते, जिस कारण ये ट्रेन को बाध‍ित भी नही करते हैं. इन्‍हीं पत्‍थरों के कारण रेलवे ट्रैक भी ऊंचा होता है, इसलिए जब भी बारिश के मौसम में पानी भरता है तो ट्रैक नहीं डूबता और आपका सफर लगातार जारी रहता है.