Ayushman Bharat scheme: ट्रांसजेंडर समाज के लिए केंद्र सरकार ने आज बुधवार को बड़ा ऐलान किया है. अब आम नागरिकों की तरह ट्रांसजेडर भी आयुष्मान भारत योजना से जुड़ सकेंगे और इसका लाभ उठा सकेंगे. सामाजिक न्याय मंत्रालय और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के बीच इसके लिए बुधवार को एक MoU साइन किया गया है. ये इसलिए जरूरी था क्योंकि ट्रांसजेंडरों को इलाज हासिल करने में बहुत दिक्कतें आती रही हैं. स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया के मुताबिक ये कदम उठाना जरुरी था, क्योंकि सहानुभूति से ज्यादा उन्हें अधिकार दिया जाना चाहिए.

ट्रांसजेंडरों के लिए खुशखबरी

आयुष्मान भारत योजना में  एक परिवार को 5 लाख का कवरेज मिलता है. 5 लाख रकम तक का ही इलाज भी मुफ्त मिलता है. अब ट्रांसजेंडरों को ये दोनों ही लाभ मिल सकेंगे. भारत में 4 लाख 80 हजार ट्रांसजेंडर हैं. जिनकी लिस्ट आयुष्मान भारत लाभार्थियों में जोड़ी जा रही है. अब ट्रांसजेंडर इस योजना के तहत  sex ressignment surgery यानी लिंग परिवर्तन की सर्जरी करवा सकते हैं.

सरकार ने जारी किया बयान

सरकार ने बुधवार को एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा कि ऐतिहासिक कदम के तहत ट्रांसजेंडरों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के दायरे में लाया जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि इस कदम से एबी पीएम-जेएवाई के तहत स्वास्थ्य सेवाओं तक सही पहुंच सुनिश्चित होगी।

मास्टर पैकेज तैयार किया जा रहा

इस बारे में बताते हुए मंडाविया ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और सामाजिक न्याय और रोजगार मंत्रालय (एमओएसजेई) के बीच यह समझौता ज्ञापन देश भर में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल द्वारा जारी ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र रखने वाले) को सभी स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगा. मंत्रालय ने कहा कि इस कदम के तहत ट्रांसजेंडरों के लिए एक व्यापक मास्टर पैकेज तैयार किया जा रहा है. जिसमें मौजूदा पैकेज और विशिष्ट पैकेज (सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (एसआरएस) और उपचार) शामिल हैं.

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई पहल

मंडाविया ने जोर देकर कहा कि सरकार न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को मान्यता देने के लिए निर्णायक तरीके से काम कर रही है बल्कि उनके कल्याण के लिए विभिन्न व्यवस्थित कदम उठाए हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई पहल की हैं, चाहे वह ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’, गरिमा गृह, पीएम दक्ष या अन्य हों.