Ghulam Nabi Azad quits Congress: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद कांग्रेस में भूचाल आ गया है. आजाद ने 5 पन्नों की चिट्टी लिखकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेजा है. साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके आने के बाद से पार्टी में चर्चा खत्म हो गई और उनके करीबी ही सारे फैसले लिया करते हैं. गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अफसोस जताया है. उन्होंने जी न्यूज से खास बातचीत करते हुए कहा कि वह लंबे वक्त से पार्टी से जुड़े थे और ऐसे में उनका कांग्रेस छोड़ना काफी दुखद है.

कांग्रेस में कम हुई थी इज्जत

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि छात्र राजनीति से लेकर सांसद, केंद्र में मंत्री और फिर मुख्यमंत्री का सफर उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए तय किया था. साथ ही इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी, संजय गांधी और फिर सोनिया गांधी के साथ काम करने का अनुभव उनके पास था. ऐसे में आजाद का पार्टी छोड़ना अफसोसजनक है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आजाद की इज्जत कम हुई और इसी वजह से वह आहत भी थे. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें आजाद से ऐसी उम्मीद नहीं थी, उनको पार्टी में बात करनी चाहिए थी.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश की आजादी के लिए लड़ी है और ऐसे में आजाद समेत उन्हें समर्थकों को थोड़ा सब्र रखना चाहिए. आजाद जैसे नेताओं के जाने से कांग्रेस कमजोरी होगी और इससे पूरा विपक्ष कमजोर होगा. प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विपक्ष का मजूबत होना जरूरी है. फारूक ने कहा कि आजाद सिर्फ कांग्रेस के नहीं बल्कि पूरे मुल्क के नेता हैं और उन्होंने देश के लिए काम किया है.

खुद से फैसले लें राहुल गांधी

फारूक ने कहा कि सोनिया गांधी की सेहत पिछले कुछ दिनों ठीक नहीं रही और शायद इसी वजह से कम्युनिकेशन नहीं हो पाया. उन्होंने उम्मीद जताई कि सोनिया गांधी इस बारे में जरूर कुछ कदम उठाएंगी और मुद्दों को सुलझाया जा सकेगा. फारूक ने कहा कि कांग्रेस मिटने वाली नहीं है और वह मजबूत पार्टी है. अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस से कांग्रेस की तुलना पर फारूक ने कहा कि राहुल गांधी अक्लमंद आदमी है और उन्हें भी आजाद के फैसले का एहसास है. उन्हें दूरियां पैदा करने वाले लोगों को अपने से दूर करना चाहिए ताकि दूरियां मिट सकें. उन्होंने कहा कि राहुल किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपने फैसले खुद लें ताकि दूरियां बढ़ाने वाले लोगों की दखल पार्टी के भीतर कम हो सके.