ग्रैंड न्यूज़ डेस्क। INTERESTING NEWS : रुद्राक्ष अनादि काल से जाना, पहचाना और उपयोग मे लाया जाता रहा है. और अब वैज्ञानिक शोध ने भी इसकी शक्ति को पहचाना है. Rudraksh पहनना प्राचीनकाल से ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके महान उपचार और वैज्ञानिक गुणों के कारण यह न केवल बड़े से बड़ा रोग ठीक कर सकता है, बल्कि हमारे मन और शरीर पर भी अ’छा प्रभाव डालता है.

रुद्राक्ष और भगवान शिव का सम्बन्ध

भगवान भोलेनाथ की पूजा में Rudraksh का विशेष महत्व है. कहा जाता हैं कि रुद्राक्ष कि उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है. इसकी उत्पत्ति को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. रुद्राक्ष रुद्र और अक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है. रुद्र का अर्थ शिव होता है और अक्ष का मतलब भगवान शिव की आंख से है. Rudraksh की माला हमारे अंदर सकारात्मकता ऊर्जा पैदा करती है. बिजी लाइफस्टाइल में तनाव, सिरदर्द, उलझन, घबराहट को दूर करने के लिए भी आप Rudraksh धारण कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें इससे पहनने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.

एंटीइंफ्लेमेट्री और एंटीबैक्टीरियल गुण होता है

वैज्ञानिक अध्ययन साबित करते हैं कि रुद्राक्ष की माला में डायइलेक्ट्रिक गुण होते हैं, जो खराब ऊर्जा को स्टोर करने के लिए जाने जाते हैं. जब भी हम शारीररिक या मानसिक रूप से तनावग्रस्त होते हैं, तो उस वक्त हमारा शरीर ज्यादा ऊर्जा पैदा करता है, जिसे अगर स्टोर या बर्न न किया जाए, तो ब्लड प्रेशर, चिंता, अवसाद जैसी कई समस्याएं बढ़ती हैं.

ऐसे में रुद्राक्ष की माला इस अनचाही ऊर्जा को स्थिर कर तंत्रिका तंत्र में सुधार और हार्मोन को संतुलिन करने में मदद करती है. Rudraksh की माला में एंटीइंफ्लेमेट्री और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. इसलिए विद्वान अक्सर भीगे हुए रुद्राक्ष का पानी पीने की सलाह देते हैं. ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार होता है. Read More – मां बनने वाली हैं Tanvi Thakkar, नए साल की बधाई के साथ दी खुशखबरी …

चुंबकीय गुण करता है दिल और बीपी की रक्षा

रुद्राक्ष के मोती डायनामिक पोलेरिटी गुणों की वजह से एक चुंबक की तरह काम करते हैं. चुंबकीय प्रभाव के कारण Rudraksh शरीर की अवरूद्ध धमनियों और नसों में रूकावट को दूर करता है. इसे पहनने से ब्लड फ्लो भी अच्छे से होता है. खास बात है कि रुद्राक्ष की माला में शरीर में होने वाले किसी भी तरह के दर्द और बीमारी को दूर करने की क्षमता है.

रुद्राक्ष के प्रकार और उनका महत्व

रुद्राक्ष 1 मुख से लेकर 21 मुखी तक अलग-अलग मुखी आते है. इनमें से 1 से 14 आसानी से उपलब्ध हैं. प्रत्येक Rudraksh का अपना महत्व है. जिसमें आसानी से मिलने वालों में एक मुखी Rudraksh में भगवान शिव का संरक्षक होता हैं. यह सर्वोच्च चेतना के बारे में जागरूकता लाता है. दो मुखी शिव और शक्ति के संयुक्त रूप अर्धनारीश्वर, इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं. तीन मुखी Rudraksh अग्नि इस रुद्राक्ष की अपनी दिव्यता है. चार मुखी रुद्राक्ष- गुरु इस Rudraksh के संरक्षक देवता हैं. पांच मुखी रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र, इस रुद्राक्ष की अध्यक्षता करते हैं. यह रुद्राक्ष हमारी आंतरिक जागरूकता को बढ़ाता है, जिससे हम अपने उच्च स्व में पहुँचते हैं।

जानिए रुद्राक्ष के फायदे-

इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फ्लोरिडा के वैज्ञानिकों के अनुसार, रुद्राक्ष मास्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पावर होती है, जिसके चलते यह हमारे शरीर पर जादुई रूप से काम करता है. रुद्राक्ष के कई फायदों से आप परिचित होंगे, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर यह आपके स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद है, बता रहे हैं आचार्य विक्रमादित्यः

एक मुखी रुद्राक्ष

यह अत्यंत दुर्लभ होता है. यह बहुत कम पाया जाता है और इसकी कीमत भी अधिक होती है. इसीलिए कई लोग नकली एक मुखी रुद्राक्ष बनाकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं. एक मुखी रुद्राक्ष खरीदते समय असली-नकली का पता लगाने के बाद ही खरीदें. एक मुखी रुद्राक्ष मुख्यतः हृदय संबंधी रोगों पर असर करता है. यह शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से करने की व्यवस्था करता है.

दो मुखी रुद्राक्ष

दो मुखी रुद्राक्ष का संबंध पेट के रोगों से है. गैस प्रॉब्लम, एसिडिटी में दोमुखी रुद्राक्ष असरकारक है. साथ ही यह तनाव और अवसाद दूर करने में चमत्कारिक रूप से असर करता है. हिस्टीरिया की बीमारी को कंट्रोल करने में भी यह रुद्राक्ष प्रभावी है.

तीन मुखी रुद्राक्ष

जिन बच्चों को बार-बार बुखार आता हो उन्हें तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है. लिवर और गाल ब्लेडर की समस्या, तनाव-अवसाद दूर करने में भी तीन मुखी रुद्राक्ष असरकारक है. इस रुद्राक्ष से ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है.

चार मुखी रुद्राक्ष

चार मुखी रुद्राक्ष किडनी की समस्या वालों को जरूर धारण करना चाहिए. थायराइड, मस्तिष्क से संबंधित रोग, मानसिक बीमारी, मनोरोग, कमजोर याददाश्त और हकलाकर बोलने जैसी समस्याओं में चार मुखी रुद्राक्ष काफी फायदा पहुंचाता है.

पांच मुखी रुद्राक्ष

लिवर और गाल ब्लेडर की बड़ी समस्याओं के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करवाया जाता है. यह ब्लड प्रेशर को भी बहुत अच्छे तरीके से कंट्रोल करता है.

छह मुखी रुद्राक्ष

गला, गर्दन, किडनी, यौन रोग, जलोदर, यूरिन इंफेक्शन, आंखों की समस्या और अपच की समस्या में छह मुखी रुद्राक्ष असरकारक है.

सात मुखी रुद्राक्ष धारण

तनाव और अवसाद हो तो सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए. खासकर प्रोफेशनल और वे युवा जो कॉरपोरेट जगत में अपना नाम करना चाहते हैं, लेकिन अत्यधिक तनाव और प्रेशर में काम करने के कारण अपना आउटपुट नहीं दे पाते तो उन्हें सात मुखी रुद्राक्ष से काफी लाभ होता है.

आठ मुखी रुद्राक्ष

अनिद्रा की समस्या होना, देर रात तक नींद न आती हो, मन में घबराहट हो और नींद की कमी के कारण अन्य समस्या होने लगे तो ऐसे लोगों को आठ मुखी रुद्राक्ष पहनने की सलाह दी जाती है.

नौ मुखी रुद्राक्ष

शरीर में दर्द रहता हो. जोड़ों में अक्सर दर्द होता हो. पीठ में, कमर में लगातार दर्द बना हुआ है तो नौ मुखी रुद्राक्ष दर्द निवारक का काम करता है. इससे पहनने से और इसका पानी पीने से दर्द में आराम मिलता है.

दस मुखी रुद्राक्ष

वैसे तो सभी तरह के रुद्राक्ष की तासीर गर्म होती है, लेकिन दस मुखी रूद्राक्ष में कुछ ज्यादा ही गर्माहट होती है. इसलिए इसे उन लोगों को धारण करने को कहा जाता है जो लंबे समय से सर्दी-खांसी से परेशान हैं.

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

शरीर दर्द, पीठ दर्द के अलावा प्री मैच्योर डिलिवरी से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए. अत्यधिक शराब पीने की लत छुड़ाने के लिए भी ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया जाता है.

बारह मुखी रुद्राक्ष

हृदय और रक्त संबंधी रोगों के उपचार में बारह मुखी रुद्राक्ष काफी कारगर है. सूखा रोग और ऑस्टियोपोरोसिस के रोगियों को भी बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.

तेरह मुखी रुद्राक्ष

मांसपेशियों से संबंधित कोई रोग हो तो तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.

चौदह मुखी रुद्राक्ष

तनाव और अवसाद दूर करने के लिए चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए. इससे अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है।