जिनेवा। BIG NEWS : देश-दुनिया में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना ने इस नए वैरिएंट ने चीन में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इसके अलावा अमेरिका में भी कोरोना के नए वैरिएंट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसे लेकर चीन समेत अन्य देश भी अलर्ट हो गए हैं। कोरोना के इस नए वैरिएंट के कुछ मामले भारत में भी सामने आए हैं। जिससे लोगों के मन में डर बैठ गया है। भारत में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए WHO ने चेतावनी जारी की है।

 

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि एजेंसी ने हाल में चीनी अधिकारियों के साथ मुलाकात की ताकि अस्पताल में भर्ती होने की दर और आनुवंशिक अनुक्रम सहित कोविड-19 के मामलों के बारे में अधिक जानकारी साझा करने के महत्व को रेखांकित किया जा सके। उन्होंने कहा कि हालांकि, 2019 के अंत में महामारी के शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर इसमें गिरावट जारी है। इस बीच एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज में कहा जा रहा है कि भारत में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं इसलिए सरकार ने पुरे देश में 15 दिनों का लॉकडाउन लगा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये मैसेज सही नहीं है। इसके साथ ही बताते चले की चीन में कोरोना के मामलों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि वहां जल्द ही पूरे देश में लॉकडाउन लगाने का आदेश जारी कर दिया जाएगा।

 

दरअसल, चीन में कोरोना के नये वैरिएंट BF.7 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई तरह की पाबंदियां भयउ लगाईं गई है। भारत में भी कोरोना के ओमीक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक मैसेज लोगों के व्हाट्सप्प और मोबाइल पर आ रहा है कि सरकार ने देश में 15 दिनों का लॉकडाउन लगा दिया है। इसके साथ ही इसमें दावा किया गया गया है कि मोदी सरकार ने ऐसा ऐलान किया है। इस मैसेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी लगी हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये मैसेज गलत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ने बुधवार को कहा कि समूचे चीन में कोरोना वायरस के विस्फोटक प्रसार और सरकार के आंकड़ों की कमी के बीच एजेंसी ‘चीन में लोगों के जीवन के लिए मौजूदा खतरे को लेकर चिंतित’ है।

 

टेड्रोस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘आंकड़ा वैश्विक स्थिति के नियमित, तीव्र और ठोस जोखिम आकलन के लिए डब्ल्यूएचओ के वास्ते आवश्यक है।’’ टेड्रोस ने कहा कि वह समझते हैं कि क्यों कई देशों ने हाल में चीन से आने वाले यात्रियों के खिलाफ कदम उठाए हैं।