धरसींवा। CG NEWS : छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद प्रदेश में औद्योगीकरण की तेज़ी के चलते सिलतरा से धरसींवा तक के दर्जनभर गांवों में हवा जहरीली हो चुकी है। इस क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाले काले धुएं और प्रदूषण के कारण वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। औद्योगिक विकास से जहां प्रदेश ने प्रगति की राह पकड़ी, वहीं इस क्षेत्र के ग्रामीणों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों पर पड़ रहा गंभीर असर
पिछले 25 वर्षों में सिलतरा, साकरा, सौंदरा, टाढ़ा और धरसींवा सहित कई गांवों में उद्योगों की बाढ़ आ गई, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ा है। किसान और रहवासी जहरीली हवा और बाहरी तत्वों की गुंडागर्दी से परेशान हैं। वहीं, स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने की समस्या भी झेलनी पड़ रही है।
बीमारियों का बढ़ता प्रकोप
कोरोना महामारी के बाद भी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। त्योहारों पर आतिशबाजी, पराली जलाने और फैक्ट्रियों के धुएं के कारण वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी हवा को जहरीला बना रही है। परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में लोग सांस की बीमारियों और चर्म रोगों की चपेट में आ रहे हैं।
स्थानीय युवाओं की चिंता
धरसींवा के युवा और समाजसेवी इस बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंतित हैं। समाजसेवी याकूब खान और शिक्षा विद् चंद्रकांत साहू का कहना है कि क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और वाहनों की संख्या में वृद्धि वायु प्रदूषण को चरम स्तर पर पहुंचा रही है। सिलतरा और आसपास के 200 से अधिक पावर प्लांट्स से निकलने वाला धुआं कैंसर और असमय प्रसव जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे रहा है।
मॉनिटरिंग की कमी और प्रशासन की उदासीनता
सिलतरा और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की मॉनिटरिंग की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत प्रयास करने वालों को भी कोई सहयोग नहीं मिलता, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
चिकित्सकों की चेतावनी
बीएमओ धरसींवा डॉ. विकास तिवारी ने बताया कि गर्मी के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अस्पतालों में दमा और चर्म रोग के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।