पखांजूर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ के कोयलीबेड़ा विकासखंड से महज 25 किमी दूर स्थित रामपुर के आश्रित ग्राम कलर टोला आज भी विकास की रोशनी से कोसों दूर है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यहां के ग्रामीण कठिनाइयों से भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, जिससे ग्रामीणों को जरूरत का सामान लाने-ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को पगडंडियों के सहारे ही आना-जाना पड़ता है।
बिजली के इंतजार में बीत गए साल
गांव में आज भी बिजली की सुविधा नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल ने दो साल पहले गांव में सर्वे किया था, लेकिन अभी तक न तो बिजली के खंभे लगे और न ही किसी घर तक बिजली पहुंची। 150 की आबादी वाला यह गांव आज भी अंधेरे में रातें गुजारने को मजबूर है।
शिक्षा और योजनाओं से अनजान ग्रामीण
गांव में न तो कोई स्कूल है और न ही कोई शिक्षा केंद्र, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में है। इतना ही नहीं, ग्रामीण सरकारी योजनाओं से पूरी तरह से अंजान हैं। कई महिलाओं को ‘महतारी वंदना योजना’ की कोई जानकारी नहीं है और कई ग्रामीणों को आधार कार्ड तक के बारे में पता नहीं। सरकारी लाभ से वंचित रह जाने के कारण इनका जीवन और भी कठिन हो गया है।
बारिश में बीमार को कंधे पर ले जाना पड़ता है
गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं। बारिश के मौसम में अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो मरीज को कंधे पर उठाकर कई किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाना पड़ता है। राशन की दुकान भी घने जंगलों के बीच काफी दूर स्थित है, जिससे अनाज लाना भी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों की सरकार से गुहार
गांव के लोगों ने सरकार से मांग की है कि उनके गांव में जल्द से जल्द सड़क, बिजली और स्कूल की व्यवस्था की जाए, ताकि वे भी मुख्यधारा से जुड़ सकें और उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के 78 साल बाद भी इस तरह की स्थिति सरकार की विकास योजनाओं पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस समस्या पर ध्यान देता है।