चूहों का दम घुटने लगता है तथा चूहे एक-एक कर बाहर निकलना शुरू कर देते हैं, रोज 15-20 चूहे मारकर ही घर जाते हैं छात्र,

कोण्डागांव । सरकार शिक्षा में सुधार के नाम पर आदिवासी अंचल में अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाती हैं। सरकारी अमला बस्तर में शिक्षा में सुधार के अनेक दावे करते करती है, लेकिन हकीकत कुछ अलग ही है। कोडागांव के बड़े राजपुर ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में यदि आप जाएं तो स्कूली बच्चे खाली पड़े खेतों में चूहों का शिकार करते दिख जाएंगे और बच्चियां सिर पर लकड़ी का बोझा ढोते हुए। कहीं कहीं तो पेयजल की जिम्मेदारी भी इन्हीं नन्हे कंधों पर दिखाई देती है। यहां बांसकोट गांव हो या शामपुर, दोनों ही जगह स्कूलीं बच्चों की ज्यादा रूचि पढ़ने के बजाय चूहों के शिकार करने में ज्यादा है। वहीं शिक्षक भी इस मामले लापरवाह नजर आते हैं।

धान की फसल कटने का रहता है इंतजार

धान की फसल कटने के बाद आजकल खेत बंजर हैं, जहां खेतों में आदिवासियों को चूहों का शिकार करते देखा जा सकता है। ग्राम बांसकोट में तो ये हाल है कि बच्चे स्कूल से जैसे ही निकलते हैं, तो चूहों को मारने के लिए खेत में पहुंच जाते हैं। ये छात्र घर से तो खाली हाथ आते हैं, लेकिन जब घर वापस आते हैं तो 15-20 चूहों को मारकर ही घर ले जाते हैं।

ऐसे करते हैं चूहों का शिकार

आजकल खेतों में धान की कटाई हो चुकी है। बस्तर में ज्यादातर एक फसली व्यवस्था है, इस समय खेत बंजर पड़े हैं। खेतों के मेड़ों पर चूहों का डेरा होता है। आदिवासी रमलू राम एवं सरादू राम ने बताया कि पहले चूहे का बिल ढूंढा जाता है। जब चूहे का दो बिल मिल जाए तो चूहा पकड़ना आसान हो जाता है। एक बिल को मिट्टी से बंद कर दिया जाता है तथा दूसरे बिल से धुंआ की धूनी दी जाती है , मिर्च डालकर भी धूनी देते हैं, जिससे चूहों का दम घुटने लगता है तथा चूहे एक-एक कर बाहर निकलना शुरू कर देते हैं। यहीं से चूहों का शिकार होता है।

घर में बनता है लजीज व्यंजन

आदिवासियों में चूहों का को खाने की परंपरा है। इसके अलावा छोटी मछलियां एवं पक्षियों का व्यंजन भी काफी चाव से खाते आ रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बच्चे भी चूहों का शिकार करते हैं तथा उससे लजीज एवं जायकेदार व्यंजन बनाया जाता है।

गरीबी ने बचपन छीन लिया

एक ओर शहरी संपन्न बच्चे मोबाइल, कम्प्यूटर, वीडियो गेम्स में अपना आनंद उठाते हैं, तो वहीं आदिवासी एवं गरीब बच्चे कहीं चूहों का शिकार तो कहीं कीचड़ में उतरकर मछलियों के लिए जाल फेंकते दिखाई देते हैं।

हम कार्रवाई करेंगे

जिला शिक्षा अधिकारी कोण्डागांव राजेश मिश्रा ने पहले तो इस प्रकार की लापरवाही से इनकार किया किंतु बाद में जब उनको वीडियो फुटेज एवं फोटो होने की बात कही गई तो उन्होंने कहा कि वह अभी छुट्टी पर हैं। जब सोमवार को वापस लौटेंगे तो इस पर जांच करेंगे तथा अवश्य ही कार्यवाही करेंगे।

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