करीब 200 साल पहले की बात है, सरगुजा रियासत सहित मध्यभारत के कई क्षेत्रों में हाथियों का भीषण आतंक था।

रायपुर । आज छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों का हमला जनता के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। राज्य के कई जिले हाथियों की हिंसा से प्रभावित हैं। आए दिन लोगों की मौत हो रही है और उनके खेत-खलिहान उजड़ रहे हैं। यह समस्या आज की नहीं है।

प्रदेश के उत्तरी सरगुजा, जशपुर, कोरबा सहित महासमुंद और धमतरी जिलों में पिछली कई शाताब्दियों से हाथियों और मानव के बीच द्वंद्व जारी है। एक समय था जब छत्तीसगढ़ के एक शूरवीर राजा ने जनता को हाथियों के हमले से पूरी तरह मुक्ति दिला दी थी। एलिफेंट कैचर के रूप में पूरी दुनिया में उनकी ख्याती फैली थी और वे जानवरों का महासंग्राम रोकने के लिए अफ्रीका तक गए थे।

करीब 200 साल पहले की बात है, सरगुजा रियासत सहित मध्यभारत के कई क्षेत्रों में हाथियों का भीषण आतंक था। जंगली हाथी गांवों में घुसते थे और वहां जनजीवन को पूरी तरह तहस-नहस कर देते थे। इस समय सरगुजा रियासत के महाराज रघुनाथ शरण सिंहदेव ही ऐसे व्यक्ति थे जो जनता को इस आतंक से मुक्ति दिला सकते थे।

उन्हें उस जमाने में देश का सबसे सिद्धहस्त एलिफेंट कैचर माना जाता था। सरगुजा महाराज ने हाथियों के आतंक से जनता को मुक्ति दिलाने की ठानी और स्वयं एक हाथी पर सवार होकर हाथियों को खदेड़ने के लिए निकले। कहा जाता है कि महाराजा के व्यक्तित्व में बड़ा ही अनोखा जादू था। उनके सामने आते ही हाथी खुद-ब-खुद काबू में आ जाते थे।

उनके बेटे महाराजा रामानुज शहर सिंहदेव भी अपने जमाने के सिद्ध हस्त एलिफेंट कैचर थे। महाराज रघुनाथ शरण के दौर में पूरा मध्यभारत हाथियों के आतंक से मुक्त हो गया था। उनके पुत्र महाराज रामानुज शरण सिंह देव को ब्रिटिश सरकार ने अफ्रीका में एक दुर्दांत गैंडे का शिकार करने और हाथियों को नियंत्रित करने के लिए भेजा था।

सरगुजा रियासत के इतिहासकार पं. गोविंद शर्मा बताते हैं कि उस वक्त सरकार ने उनके कहने पर एक डबल बैरल वाली विशेष गन उनके लिए तैयार कराई थी। यह अपने तरह की दुनिया की इकलौती गन थी। बाद में इस गन की कॉपी न हो सके इसके लिए सके डाई को डिस्ट्रॉय कर दिया गया था।

उस वक्त केनिया, तंजानिया और युगांडा की सीमा पर एक दुर्दांत गेंडे का आतंक था। यह गैंडा घायल था और इधर से उधर बेलगाम दौड़ता था। इस गैंडे ने वहां कई हाथियों को भी घायल कर दिया था। इसके चलते यहां इन दो विशालकाय जीवों के बीच एक महासंग्राम छिड़ गया था, जिसके बीच वहां की जनता पिस रही थी।

अपनी विशेष डबल बैरल गन के साथ वहां पहुंचे महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव ने इस महासंग्राम को सफलतापूर्वक खत्म करते हुए वहां की जनता को दुर्दांत जानवरों के आतंक से मुक्ती दिलाई थी। महाराजा रघुनाथ शहर सिंहदेव राज्य सरकार के वर्तमान कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव के दादा के दादा और महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव, टीएस सिंहदेव के दादा के पिता थे।

वर्तमान में टीएस सिंहदेव भी राज्य में हाथियों के हमले को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं और ठोस रणनीतियां बनाने में जुटे हैं। उनकी पहल पर सरगुजा क्षेत्र में आठ गजराज वाहनों का दल लोगों को हाथियों के हमले से सुरक्षित रखने के लिए तैनात किया गया है।

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