रायगढ़ अधिवक्ता संघ की कल्याण योजना को आम बोल-चाल की भाषा में लकड़ी फट्टा योजना कहा जाता है

रायगढ़ । कहते हैं कि असल मायने में मदद व सहायता वही है, जो पीड़ित तक उसके आंसू सूखने से पहले पहुंच जाए। रायगढ़ जिले का अधिवक्ता संघ कुछ इसी सोच के साथ अधिवक्ता कल्याण योजना का संचालन करता है। अपने किसी भी सदस्य साथी अधिवक्ता के निधन के तीसरे दिन अनिवार्य रुप से सवा लाख की सहायता राशि उनके आश्रितों तक पहुंचाता है। गौर करने वाली बात यह है कि इसके लिए संघ अधिवक्ताओं से प्रति माह मात्र 15 रुपए लेता है।

स्टेट बार कौंसिल छत्तीसगढ़ से संबद्ध रायगढ़ का अधिवक्ता संघ आज छत्तीसगढ़ के अधिवक्ता संघों के लिए अनुकरणीय है। संघ इस योजना को 1992 से संचालित कर रहा है। आज संघ में 750 सदस्य हैं। रायगढ़ अधिवक्ता संघ की कल्याण योजना को आम बोल-चाल की भाषा में लकड़ी फट्टा योजना कहा जाता है।

रायगढ़ अधिवक्ता संघ के तत्कालीन अध्यक्ष बीएल पांडेय ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस योजना की शुरुआत की। पिछले वर्ष तक इस योजना में 50 हजार की सहायता दी जाती थी पर अब यह राशि सवा लाख हो गई है।

आज पूरे छत्तीसगढ़ में रायगढ़ अधिवक्ता संघ अपने तरह का पहला संगठन है जो अपने साथी के निधन पर उसके श्राद्ध-कर्म के लिए इतनी बड़ी धनराशि प्रदान करता है। सनद रहे कि इस सहायता राशि में सरकार से प्रदत एक रुपया भी नहीं है।

प्रारंभ में एक रुपया शुल्क था और दिया जाता था पांच हजार

अधिवक्ता संघ ने जब 1992 में इस योजना को प्रारंभ किया तो सदस्यों से इसके लिए एक रुपये प्रति माह का शुल्क लिया जाता था। उस समय सहायता राशि पांच हजार रुपये दी जाती थी। बीएल पांडेय की अध्यक्षता में इस को प्रारंभ किया गया था। संघ के पास उस समय सदस्य संख्या 250 थी।

कई संघों ने किया प्रयास पर नहीं मिली सफलता

राज्य के कई जिलों के अधिवक्ता संघों ने इस तरह का प्रयास किया पर वे सफल नहीं हो पाए। इस तरह की सहायता के लिए छोटे शुल्क पर सुविधा उपलब्ध कराने वाला रायगढ़ अधिवक्ता संघ पहला संगठन है। अधिवक्ताओं के निधन पर लगभग सभी संघ व बार सहयोग राशि प्रदान करते हैं पर मदद की इतनी बड़ी राशि कहीं नहीं दी जाती।

50 हजार से बढ़ा अब सवा लाख की धनराशि : सत्येंद्र सिंह

रायगढ़ अधिवक्ता संघ के लगातार तीसरी बार अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बताया कि जब वे संघ के अध्यक्ष बने थे तो सहायता राशि 50 हजार रुपये थी। जिसे बढ़ाकर पहले एक लाख और अब तीस दिसंबर से सवा लाख कर दिया गया है। कहा कि अधिवक्तक्ता इसके लिए प्रतिमाह 15 रुपये का शुल्क अदा करते हैं पर सदस्यता शुल्क व वकालतनामा आदि मदों से भी इस मद में पैसा दिया जाता है।

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