लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ आ गए हैं. दोनों पार्टियों की नजर दलित, ओबीसी और खास तौर पर मुस्लिमों वोटों पर है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गढ़ में समाजवाजी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी का डब्बा गोल कर दिया था. तब से कयास लग रहे थे कि यूपी में मायावती और अखिलेश यादव मिलकर नरेंद्र मोदी के विजय रथ को थाम लेंगे. शनिवार को औपचारिक रूप से मायावती और अखिलेश साथ आ गए हैं.

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा और बसपा का गठबंधन बड़ी राजनीतिक घटना है. अखिलेश और मायवती के साथ आने से दलित- ओबीसी गठजोड़ ताकतवर तो बनेगा ही मुसलमान वोटर भी निर्णायक भूमिका में नजर आएंगे. इस गठबंधन से पिछड़े-दलित और मुसलमानों में एकजुटता की संभावना बढ़ गई. जो कहीं न कहीं बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पहले एसपी-बीएसपी के बीच बंटने वाला मुसलमान वोट अब सीधे गठबंधन को मजबूती देगा. यानी पिछड़े-दलित और मुसलमानों की तिकड़ी राजनीतिक तौर पर विनिंग कॉम्बिनेशन बनाती दिख रही है.

27 सीटों पर निर्णायक भूमिका में मुस्लिम

साल 2011 के जनगणना के मुताबिक यूपी में 19.5 फीसदी मुसलमान वोटर हैं. सूबे में 38 जिलों और 27 लोकसभा की सीटों पर मुसलमानों की निर्णायक आबादी है. वहीं 125 विधानसभा सीटों पर मुस्लिमों की पकड़ तगड़ी है. माना जा रहा है कि मायावती और अखिलेश के गठबंधन से पहले मुसलमान वोटरों के सामने दुविधा की स्थिति थी. हालांकि अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. ‘आजतक’ से बातचीत करते हुए कई मुसलमान वोटरों ने सीधे तौर पर गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया है.

सपा-बसपा और भाजपा में होगी कांटे की टक्कर

साल 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की थी. लोकसभा चुनाव में करीब 10 फीसदी और विधानसभा चुनाव में करीब 17 फीसदी मुस्लिमों ने बीजेपी को वोट दिया था. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 42.63 फीसदी, सपा को 22.35 फीसदी और बसपा को 19.77 फीसदी वोट मिले थे. अगर सपा और बसपा का वोट प्रतिशत जोड़ दिया जाए तो आकड़ा 42.12 फीसदी तक पहुंच जाता है. वहीं, विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 40 फीसदी (312 सीट), सपा को 22 फीसदी (47 सीट) और बसपा को 22 फीसदी (17 सीट) वोट मिले थे. यानि सपा और बसपा को 44 फीसदी वोट मिले थे.

लोकसभा उपचुनाव में गठबंधन आगे

इन दोनों चुनाव के बाद हुए उपचुनावों में सपा और बसपा साथ आ गए थे. नतीजा हुआ कि बीजेपी को अपने गढ़ में करारी हार झेलनी पड़ी. फूलपुर उपचुनाव में सपा-बसपा को 47 फीसदी और बीजेपी को 39 फीसदी, कैराना में सपा-बसपा को 51 फीसदी और बीजेपी को 46 फीसदी, गोरखपुर में सपा-बसपा को 49 फीसदी और बीजेपी को 47 फीसदी वोट मिले थे.

मुस्लिमों ने कहा, गठबंधन को वोट देंगे

‘आजतक’ से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश के रहने वाले यूनुस बदरे ने कहा कि गठबंधन को वोट देंगे, ये बीजेपी को हराएगा. हाजी मुंसिफ अली रिजवी ने कहा कि गठबंधन सही समय पर आया है. हम इसको वोट देंगे कांग्रेस को नहीं. वहीं, मोहम्मद साकिर ने कहा कि कांग्रेस को लिए बगैर बीजेपी नहीं हरा पाएंगे.

मुस्लिम वोटों के बंटवारे की तुलना कम

यह भी सच्चाई है कि यूपी में मुसलमानों की बड़ी आबादी होने के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी मुस्लिम संसद नहीं पहुंच सका. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2014 में एसपी-बीएसपी और कांग्रेस के बीच मुसलमान वोटों के बंटवारे की वजह से राजनीतिक नुकसान हुआ, लेकिन अब इसबार यूपी के दो ताकतवार दल एसपी-बीएसपी एक खेमे में है- ऐसे में मुसलमानों का वोट पहले की तुलना में कम बंटेगा मुमकिन ये भी है ये बंटे ही ना.

मुस्लिम वोटों को प्रभावित करने वाले मुद्दे

तीन तलाक

राम मंदिर

गो रक्षा के नाम पर हिंसा

उर्दू शिक्षकों की छंटनी

बीजेपी फिर कर पाएगी सेंधमारी?

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को ताकत देने की कोशिश की है. राजनीतिक तौर पर इसे बीजेपी की मुस्लिम महिलाओं को अपने पक्ष में करने का दांव माना गया. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह बीजेपी आगामी आम चुनाव में भी मुस्लिम वोटों में सेंधमारी कर पाएगी या फिर मुस्लिम वोट एकतरफा सपा-बसपा के खाते में जाएंगे.

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