सरकार ने खुद माना कि नान घोटाला हुआ है-कांग्रेस

रायपुर। कांग्रेस ने एक बार फिर नान घोटाले का मुद्दा चुनाव के पहले उठाया है। राजीव भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता में मीडिया सेल प्रभारी शैलेष नीतिन त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने खुद मान लिया है कि पिछले चुनाव से ठीक पहले लाखों की संख्या में फर्जी राशन कार्ड बनाए गए थे। नान घोटाला पर हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका पर जवाब पेश करते हुए सरकार ने कहा है कि कोई घोटाला नहीं हुआ लेकिन तथ्य बता रहे हैं कि नान घोटाला हुआ और भारी भरकम घोटाला हुआ। घोटाला हुआ यह बात विपक्षी दल कांग्रेस या किसी और ने नहीं कही बल्कि सरकार की अपनी एजेंसी एसीबी ने कही है।

शैलेष ने कहा कि एसीबी ने नान घोटाले में जो छापे मारे उसमें ज़ब्त किए दस्तावेज़ों से पता चला कि पैसे ‘सीएम मैडम’, ‘सीएम कुक’ के गए, नागपुर गए (जहां आरएसएस का मुख्यालय है, और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी रहते हैं), लखनऊ गए (जहां भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते थे), एश्वेर्या रेसीडेंसी गए (जहां रमन सिंह जी की रिश्तेदार रहती हैं) और सतना गए जहां मुख्यमंत्री के रिश्तेदार रहते हैं। अब रमन सिंह जी को जनता को बताना चाहिए कि क़रीब 13 लाख फ़र्ज़ी राशन कार्ड बनाकर जो घोटाला हुआ उसका कितना पैसा किसको गया।

उन्होंने कहा कि राशन कार्ड घोटाले को लेकर एक याचिका फ़रवरी, 2016 को लगाई गई थी। इस पर सरकार को नोटिस भी जारी की गयी थी लेकिन सरकार ने मई 2018 में अपना जवाब पेश किया। इस जवाब में सरकार ने कई गड़बड़ियों को स्वीकार कर लिया है। पहला यह कि सरकार पहले भी फ़र्ज़ी राशन कार्ड बना रही थी, इसीलिए वर्ष 2010-11 में 4.34 लाख राशनकार्ड निरस्त किए गए और 2011-12में 2.03 लाख राशन कार्ड निरस्त किए गए थे। लेकिन आश्चर्यजनक रुप से सितंबर, 2013 में राशन कार्डों की संख्या एकाएक कई गुना बढ़ गई।

जनसंख्या के आंकड़े और जनसंख्या वृद्धि के आंकड़े जोड़ लें तो पता चलता है कि 2013 के अंत में छत्तीसगढ़ में कुल 59 लाख परिवार होने चाहिए थे। लेकिन सरकार ने 72.03 लाख राशन कार्ड जारी कर दिए। जब कांग्रेस ने नान घोटाले का मुद्दा उठाया तो सरकार ने राशन कार्ड निरस्त करने शुरु किए। अब सरकार के आंकड़े कहते हैं कि इस समय तक 12.90 लाख राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं. इनमें से 2.70 लाख राशन कार्ड तो ख़ुद कार्ड धारकों ने निरस्त करवाए हैं।

शैलेष कहते हैं कि सवाल यह है कि ऐन चुनाव से पहले इतनी बड़ी संख्या में फ़र्ज़ी राशन कार्ड क्यों बने? सरकार भले ही दूसरे राज्यों के आंकड़े गिनवाए लेकिन वह अपने घोटाले से बच नहीं सकती। मुख्यमंत्री को नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए। अब जनता उन्हें सबक सिखाने ही वाली है।

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