किडनी प्रभावित ग्राम सुपेबेड़ा पहुंचकर कलेक्टर ने व्यवस्थाओं के संबंध में ग्रामीणों से की चर्चा, जिम्मेदार अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देंश

गरियाबंद। कलेक्टर श्याम धावड़े ने गुरूवार को किडनी प्रभावित ग्राम सुपेबेड़ा का दौरा किया इस दौरान कलेक्टर के साथ एसपी एमआर आहिरे और जिला पंचायत सीईओ आरके.खुंटे प्रमुख रूप से मौजूद थे। गांव में पहुंचने के बाद कलेक्टर ने एक सरकारी भवन में बैठकर ग्रामीणों से करीब घंटे भर तक चर्चा कर गांव में की गई व्यवस्थाओं के विषय में जानकारी मांगा ।

इस दौरान श्री धावड़े ने सबसे पहले पानी के विषय में जानकारी मांगी जिस पर ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि प्लांट में लगाया गया पानी उन्हें मिल रहा है और वे उसका उपयोग भी कर रहे है। वहीं चर्चा के दौरान श्री धावड़े को ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक सोलर की जरूरत पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि निष्टीगुड़ा में लगाया गया सोलर सिस्टम खराब हो गया है। इस पर कलेक्टर ने पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की। वहीं जल्द ही उचित कदम उठाने के निर्देंश दिए। वहीं गांव के महेन्द्र मसरा ने कलेक्टर को बताया कि गांव में प्लांट से आ रहे पानी के निकासी नहीं हो पाने के चलते कीचड़ रोड़ पर फैल रहा है,ऐसे में यहां पर निकासी के लिए नाली की व्यवस्था की जानी चाहिए।

इस पर श्री धावड़े ने उचित कदम उठाए जाने का आश्वासन दिया। वहीं डायलिसिस मशीन के विषय में ग्रामीणों ने कलेक्टर से जानकारी मांगी। जिस पर श्री धावड़े ने बताया कि जल्द ही देवभोग सीएससी में डायलिसिस मशीन शुरू करने के निर्देंश उन्होंने दिए है। वहीं मशीन से उपचार जल्द ही देवभोग अस्पताल में शुरू किया जाएगा। वहीं कलेक्टर के दौरे से ग्रामीणों में उत्साह भी नजर आया। वहीं डायलिसिस मशीन लगने की खबर से ग्रामीण उत्साहित नजर आए। दौरे के दौरान प्रमुख रूप से एसडीओपी राहुलदेव शर्मा,एसडीएम निर्भय साहू.पीडब्लूडी के एसडीओ एम.के.साहू के साथ ही अन्य अधिकारी कर्मचारीगण प्रमुख रूप से मौजूद थे।

शिक्षक की पढ़ाई व्यवस्था पर जताई नाराजगी
कलेक्टर श्याम धावड़े के साथ ही पुलिस अधीक्षक एमआर आहिरे ने सुपेबेड़ा के प्राथमिक शाला का निरीक्षण भी किया। इस दौरान वहां पढ़ा रहे शिक्षक के सामने ही बच्चों से पहाड़ा पूछा। वहीं एक बच्ची ने तीन का पहाड़ा पढ़कर कलेक्टर श्री धावड़े को सुनाया। वहीं पांचवीं क्लास के बच्चे पहाड़ा और जीके भी नहीं बता पाए। जिस पर कलेक्टर ने शिक्षक पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं है। इसी का नतीजा है कि आज पांचवीं क्लास का बच्चा जीके का जवाब नहीं दे पा रहा है। उन्होंने कहा कि दस दिन के अंदर वे फिर से सुपेबेड़ा का दौरा कर स्कूल आएंगे,ऐसे में दस दिनों के अंदर शिक्षक को पढ़ाई व्यवस्था में कसावट लाने के निर्देंश दिए।

नहीं होती ग्राम सभा की बैठक
ग्रामीणों ने कलेक्टर श्री धावड़े को बताया कि बीते चार साल से यहां ग्रामसभा नहीं हो रही है। ग्रामीणों की माने तो मात्र पंच और सरपंच और सचिव एक पेड़ के नीचे ग्रामसभा की प्रक्रिया पुरी कर लेते है। ऐसे में ग्रामीण अपनी समस्या पंचायत की बैठक में रख नहीं पाते,जिसके कारण उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी के साथ ही ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि यहां अभी तक पंचायत भवन ही नहीं है.पंचायत का कामकाज पेड़ के नीचे बैठकर ही किया जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन स्वीकृत हुआ था,काम आधा-अधूरा किया गया,इसके बाद पूर्व सरपंच और सचिव ने उसे पूरा नहीं किया। आज भी आधा-अधूरा प्लीथ लेवल तक काम हो पाया है और बीते दस साल से पंचायत भवन का काम अधूरा पड़ा हुआ है। वहीं कलेक्टर ने जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ ही पंचायत सचिव को निर्देंशित किया कि स्कूल के सामने वाली भवन का मरम्मत करवाकर पंचायत यहां लगाया जाए।

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