अंगेश हिरवानी, नगरी। Navratri Special Story :चलिए हम बात करते हैं धमतरी जिला के वनांचल क्षेत्र,नगरी से छै: किलो मीटर की दूरी पर स्थित सिहावा की शीतला माता की।
वैसे तो भारत के सभी जगह में माता की पूजा अर्चना विभिन्न रूपों में होती है कहा जाता है कि सृष्टि के आदि से ब्रह्मा विष्णु महेश,माता की शक्ति से ही ब्रह्मा सृष्टि के निर्माता विष्णु पालनकर्ता एवं शिवजी संहारक के रूप में कार्य करते हैं तथा सभी इंद्रआदि देव अपने अपने कार्य का निर्वहन करते हैं वैसे तो छत्तीसगढ़ में विभिन्न प्रांत के सभी गांव शहर एवं कस्बो में मां शीतला की स्थापना पूजन एवं आराधना होती है इन्हीं में से एक धमतरी जिला के सिहावा गढ़ भी है जहां मां शीतला स्वयंभू शीला के रूप में प्रकट है।
मां शीतला कब प्रकट हुई,कब से शीला के रूप में है, किस कारण से है,इस बात की जानकारी किसी को नहीं है। किवदंती और लोगों से मिली जानकारी व सिहावा दर्शन नामक बुक में उल्लेख के अनुसार यह क्षेत्र घनघोर जंगलों एवं पहाड़ों से घिरा हुआ था। जिसे पुराणों में दक्षिण दंडकारणीय क्षेत्र भी कहा जाता है और यह भी निर्विवाद सत्य है कि इस क्षेत्र में अनेक ऋषि महात्माओं का ताप स्थल है।
लोग कहते हैं कि इन्हीं जंगलों में एक दिन लकड़ी काटने वाला लकड़हारा लकड़ी काटने के लिए उसी जंगल में गया था और लकड़ी काटते काटते उसकी कुल्हाड़ी पत्थर से लग जाने के कारण कुल्हाड़ी का धार टूट गया, फिर वह आदमी वहीं पर एक टिलनुमा बड़े पत्थर से अपना कुल्हाड़ी को धार करने लगा,धार करते समय उस पत्थर से खून जैसे तरल पदार्थ निकलने लगा, फिर वह लकड़हारा खून की देख कर घबरा गया,और घर वापस चला गया,फिर उसे रात्रि में उसे स्वपना हुआ, कि हे मानव मै सामान्य पत्थर नहीं बल्कि आदि शक्ति शीतला मां हूं।
फिर प्रातः काल उस व्यक्ति ने इस बात की जानकारी गांव के लोगों को दी और उस स्थान और शीला के पास जाकर गांव मोकला मांझी नामक व्यक्ति को दिखाया। उस दिन से मां शीतला के रूप पूजा पाठ शुरूवात किया गया। जहा आज मां शीतला की एक विशाल भव्य मंदिर निर्माण हुआ है जहा लोग दूर दूर से मां शीतला की दर्शन करने आते हैं। साथ ही नवरात्र के पर्व मे मनोकामना कलस ज्योति प्रज्वलित करते हैं। वहां के पुजारी बताते हैं कि मां शीतला फूल और चावल को गिराकर अपने भक्तो को आशीर्वाद देते।
ये हैं मां शीतला की उत्पत्ति की कहानी