एकाधिकार चलाने वाले अफसरों की फूल रही सांसे…CM ने कहा… सुधर जाएं अधिकारी…

रायपुर। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद तत्काल किसानों के कर्ज माफी, धान का समर्थन मूल्य 2500 रूपए करने के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार अपने अन्य घोषणाओं पर फोकस कर रही है।

दूसरी ओर ऐसे अधिकारी जो पूर्व की सरकार में मनमाने ढंग से काम करते थे, उनकी सांसे फूली हुई है। कांग्रेस सरकार के मुखिया ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जो अधिकारी अब तक मनमानी करते थे, वे सुधर जाएं और अपने काम पर ध्यान देते हुए कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें।

राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही कई अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं निगम-मंडलों व आयोगों में पदस्थ अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के इस्तीफे का दौर भी अभी जारी है। इधर विभिन्न शासकीय विभागों में पदस्थ ऐसे अफसरों की सांसे फूलनी शुरू हो गई है जो अब तक एकाधिकार चलाते थे और मनमाने ढंग से काम करते थे।

कांग्रेस की सरकार बनने के पूर्व भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐसे अफसरों को सुधर जाने और अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहकर गंभीरता से काम करने की नसीहत दी थी। इधर मुख्यमंत्री का पद संभालते ही भूपेश बघेल ने अपने काम के अंदाज और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से ऐसे अधिकारियों को सकते में डाल दिया है जो अब तक अपने-अपने विभागों में एकाधिकार चलाते थे। राज्य में पदस्थ ऐसे अफसरों को डर सताने लगा है कि कार्रवाई की गाज उन पर न गिर जाए, क्योंकि ऐसे अफसर भूपेश बघेल के काम करने के अंदाज और उनके तेवर से भलीभांति वाकिफ हैं।

बहरहाल भूपेश बघेल के पूर्व में दिए गए बयानों से भी स्पष्ट है कि वे भी चाहते हैं कि ऐसे अफसर सुधर जाएं और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। लेकिन पिछले 15 सालों से एकाधिकार रखने वाले अधिकारियों के लिए यह मुश्किल साबित हो रहा है।

दूसरी ओर उनके मन में यह भी डर बना हुआ है कि यदि उनके व्यवहार में और काम में सुधार नहीं हुआ तो उनके ऊपर कार्रवाई की गाज गिरनी तय है। यही वजह है कि अधिकारी इन दिनों सुर और लय में आने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

अफसरों की यह कोशिश कितनी रंग लाती है, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तो तय हुआ कि भूपेश बघेल के मुखिया बनते ही अब प्रशासनिक कामकाज में कसावट आएगी और अब तक ऐसे अफसर जो एकाधिकार चलाते थे, उन्हें भी सुधरना ही होगा।

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