गैर मुस्लिमों को शरण मांगने पर मिलेगी भारतीय नागरिकता….. सेंट्रल कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर लगाई मुहर….शीतकालीन सत्र में ही संसद में हो सकता है पेश

नई दिल्ली। बुधवार को हुई सेंट्रल कैबिनेट की बैठक में नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 पर मुहर लग गई है। इस विधेयक के तहत भारत में शरण लेने वाले गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने पर विचार किया जा सकता है। नागरिकता बिल के जरिए 1955 के कानून को संशोधित किया जाएगा। इसमें भारत में शरण लिए गैर मुस्लिम नागरिकों को 12 साल की बजाय सिर्फ छह साल भारत में गुजारने की इजाजत दी जाएगी। संभावना है कि मोदी सरकार इस विधेयक को जारी शीतकालीन सत्र में ही संसद में पेश कर सकती है। मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को पिछले कार्यकाल में इसी साल जनवरी में ही पास करा लिया था। लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के विरोध की वजह से बिल अटक गया था। अगर बिल पास होता है तो पड़ोसी देशों से भारत में आकर बसने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने में आसानी होगी, लेकिन ये नागरिकता सिर्फ हिंदू, जैन, पारसी, बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को ही दी जाएगी।
नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 में केवल गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने के प्रावधान का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां इस मसले पर मोदी सरकार का विरोध कर रही हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मोदी सरकार बिल के जरिए धर्म के आधार पर बांट रही है। क्योंकि नागरिकता के लिए मुस्लिम शरणार्थियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। साथ ही नागरिकता मिलने का आधार 11 साल से घटाकर 6 साल कर दिया जाएगा। विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध यह है कि इसमें खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है। उनका तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की बात करता है।
पूर्वोत्तर के लोगों का विरोध है कि यदि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 पास होता है तो इससे राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत खत्म हो जाएगी। इस बिल के माध्यम से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। जबकि असम समझौते के अनुसार 1971 से पहले आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान था।

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