अमेरिका नहीं, अब कनाडा है भारतीयों की पहली पसंद क बड़ा समाचार है। विदेशों में बसने के लिए अब भारतीयों की पहली पसंद अमेरिका नहीं रहा है। वहां एच-1  बी वीजा के कड़े प्रावधानों के कारण अब भारतीय कनाडा जाना प्राथमिकता में रख रहे हैं

नई दिल्ली। एक बड़ा समाचार है। विदेशों में बसने के लिए अब भारतीयों की पहली पसंद अमेरिका नहीं रहा है। वहां एच-1  बी वीजा के कड़े प्रावधानों के कारण अब भारतीय कनाडा जाना प्राथमिकता में रख रहे हैं। बीते वर्ष 39 हजार पांच सौ भारत के नागरिक कनाडा शिफ्ट हो गए। इन्होने वहां स्थाई नागरिकता ले ली है। दरअसल कनाडा सरकार ने स्किल्ड और क्वालिफाइड लोगों से एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम में स्थाई नागरिकता का ऑफर दिया था। कनाडा सरकार की इस स्किम का लाभ भारतीयों ने जमकर उठाया। इस स्किम का सबसे अधिक लाभ भारतीयों  ने ही उठाया। कनाडा में बीते  वर्ष 92 हजार लोगों की स्थाई नागरिकता मिली जिसमे भारतीयों  की संख्या 43  प्रतिशत रही।
कनाडा, भारतीयों  को सदा से ही रिझाते रहा है। वर्ष-2017 में एक्सप्रेस एंट्री स्कीम के तहत 65500 लोगों ने कनाडा में स्थायी निवास हासिल किया था, जिसमें से 40 फीसदी यानी 26300 लोग भारतीय थे। 2017 की तुलना में साल 2018 में 51 फीसदी अधिक भारतीयों ने कनाडा की स्थायी निवास हासिल किया है। भारत के बाद नाइजीरिया का स्थान दूसरा और फिर चीन तीसरे स्थान पर है। 
अमेरिका अब नहीं रहा पहली पसंद 

ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल 38 हजार कम एच-1 बी वीजा जारी किए थे। हाल ही में अमेरिका के आव्रजन विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था। पिछले साल 3,35,000 एच-1 बी वीजा को मंजूरी दी गई थी, जबकि 2017 में इनकी संख्या 3,73,400 थी। एच1बी वीजा के लिए सबसे ज्यादा भारतीय आवेदन करते हैं। लेकिन भारतीयों को वीजा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

एच-1 बी  वीजा में देरी, ग्रीन कार्ड बैकलॉग या फिर पति व पत्नी को एच-1बी वीजा ना मिलने के चलते कई भारतीय अमेरिका से कनाडा शिफ्ट हो रहे हैं। भारत में रह रहे लोग भी नौकरी या स्थायी निवास के लिए अमेरिका की जगह कनाडा को तरजीह दे रहे हैं।

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