रायपुर. होली अवकाश के बाद शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र न केवल हंगामे की भेंट चढ़ा, अपितु सदन के भीतर जो हरकत हुई है, वह इतिहास में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस विषय को लेकर कहा कि सदन के भीतर विरोध और आरोप-प्रत्यारोप समझ आता है, गर्भगृह में प्रवेश करने तक की बात भी समझ आती है, लेकिन कार्यसूची को फाड़कर आसंदी की ओर उछालना बेहद शर्मनाक है,  निंदनीय है।
 
होली अवकाश के बाद विधानसभा का बजट सत्र एक बार फिर शुरू हुआ। हालांकि कोरोना के प्रकोप को देखते हुए कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस बात का निर्णय हो गया था कि सदन की कार्यवाही आगामी 25 मार्च तक स्थगित की जाएगी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने इस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने सत्तापक्ष पर आरोप लगाया कि सरकार सदन में चर्चा से बचना चाहती है, इसलिए कोरोना वायरस को बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। विपक्ष ने इस मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और फिर गर्भगृह में प्रवेश कर गए। गर्भगृह में विपक्ष के सदस्यों ने कार्यसूची को फाड़कर आसंदी की तरफ उछाल दिया, जिसकी वजह से विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई आगामी 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष की इस हरकत को निंदनीय कहा और सदन के इतिहास की शर्मनाक घटना बताई। वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि स्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया गया है, लेकिन विपक्ष की हरकत सदन के लिए किसी काला दिन से कम नहीं है।
 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस विषय को लेकर कहा कि विपक्ष में लंबे समय तक रहने का अनुभव उन्हें भी है। विरोध प्रदर्शन, सरकार पर आरोप लगाना, जवाब मांगना, असंतुष्टि जाहिर करना यह सब विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विपक्ष के वरिष्ठ सदस्यों ने सदन में जो कुछ किया, वह आसंदी का अपमान है, जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। बहरहाल विधानसभा अध्यक्ष ने आगामी 25 मार्च तक के लिए सदन स्थगित किए जाने की घोषणा कर दी है।