जलती हुई शव पर पुलिस ने डाला पानी, हड्डी और राख को किया जब्त, कारण जान कर हो जायेंगे हैरान, पढ़िए पूरी खबर

अंबिकापुर। बलरामपुर जिले से लगे दामोदरपुर में पुलिस ने एक ऐसी घटना का खुलास किया है ,जिसे सुनकर  सभी हैरान है। पुलिस ने हत्या के मामले  में एक जलती हुई चिता पर पानी  डाला कर  राख और हड्डिय जब्त कर ली और उसे पीएम रिपोर्ट के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया। रिपोर्ट में  मामला हत्या का सामने आया। हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उसके बेटे ने ही की थी और गाँव में यह झूठ फैलाया की पिता की मृत्यु हृदयघात से हुई है।  और अंतिम संस्कार की तैयारी आनन फानन में शुरू की गई। सुचना पर पुलिस मौके पर पहुच कर आगे की कार्रवाई में जुट गई।

  हत्या के मामले की जांच 17 जुलाई 2019 से आरंभ हुई थी। रामानुजगंज पुलिस को मोबाइल से एक व्यक्ति ने सूचना दी थी कि दामोदरपुर निवासी कार्तिक गोलदार की संदेहास्पद मौत के बाद उनके बेटों ने सामाजिक मान्यताओं को दरकिनार कर आनन-फानन में शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव से लगे कृष्णा बांध में ले गए हैं। सूचना पर जब रामानुजगंज पुलिस कृष्णा बांध के तट पर पहुंची तो वहां मौजूद लोग देखते ही देखते भाग गए। मौके पर मृतक का भाई रंजीत गोलदार मिला।

पुलिस ने इस मामल  में बेटे   पूछने पर बताया कि रात को हृदयाघात से पिता की मौत हुई है। उसने पुलिस को यह भी बताया कि एक वर्ष पूर्व मृतक को हृदयाघात जरूर हुआ था और बीमारी से एक किडनी भी निकाल दी गई थी, लेकिन जिस तरीके से शव का अंतिम संस्कार करने की जल्दबाजी की गई और ट्रैक्टर में लकड़ी रख शव को उसी में डाल ले जाया गया, उससे लगा मौत सामान्य नहीं है।

इस बयान के आधार पर पुलिस ने पीएम रिपोर्ट का इंतजार किया और गांव के कुछ अन्य से पूछताछ की तो पता चला कि जमीन को लेकर घर में कुछ विवाद चला रहा था। पिता जमीन बिक्री के पक्ष में नहीं था। इसको लेकर सब कुछ ठीक नहीं था। घटना के बाद बेटे भी सामान्य नहीं थे। उन्होंने घर छोड़कर दूसरे रिश्तेदारों के यहां रहने लगे थे। पीएम रिपोर्ट, स्वतंत्र गवाहों के बयान व संपूर्ण मर्ग जांच में पुलिस ने पाया कि मृतक कार्तिक गोलदार की हत्या दो बेटों ने की और साक्ष्य छिपाने आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार करने का प्रयास किया। जांच के आधार पर पुलिस ने मृतक के पुत्र अपूर्व गोलदार व उसके छोटे भाई के खिलाफ हत्या तथा साक्ष्य छिपाने की धारा 302, 201, 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

आरोपितों द्वारा ग्रामीणों को दी झूठी जानकारी

पिता को एक बार हृदयाघात हुआ था, ऐसे में आरोपितों को यकीन था कि लोग मान जाएंगे कि पिता की मौत हृदयाघात से हुई है। लेकिन जिस जल्दबाजी में उन्होंने शव को जलाने की कोशिश की, उससे सबका संदेह गहरा गया। गांव में किसी की मौत पर सभी जुटते थे। प्रत्येक सामाजिक मान्यता को पूरा किया जाता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुलिस के अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचते ही बयान और जांच के दायरे में आने की संभावना से लोग वहां से चले गए।

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