रायपुर। वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ हर कोई संघर्ष कर रहा है, अपने संघर्ष को जताने में कोई कमी नहीं करता, लेकिन जितनी गंभीरता से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस महामारी को छत्तीसगढ़ से खदेड़ने का भरसक प्रयास कर रहे हैं, उतनी ही संवेदनशीलता से प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. चरणदास महंत इस वैश्विक जंग में प्रदेश की सवा दो करोड़ से ज्यादा जनता के साथ खड़े हैं।
कोरोना वायरस की चपेट में आए मरीजों की सबसे पहले सुध लेने के लिए रायपुर स्थित एम्स पहुंचने वालों में डाॅ. महंत ही थे, जिन्होंने एम्स के डाॅक्टरों से प्रत्येक बातों की जानकारी ली। उनसे पूछा कि उपचार के लिए क्या प्रबंध हैं, किस तरह से इन पीड़ितों का उपचार किया जाएगा, कैसे इन्हें स्वस्थ किया जाएगा और स्वास्थ्य लाभ देकर सुरक्षित घर पहुंचाया जाएगा।
ये डाॅ. महंत ही हैं, जो प्रतिदिन एम्स में दाखिल कोरोना पीड़ितों की जानकारी लेते हैं, उनके स्वास्थ्य की प्रगति पर एम्स प्रबंधन से चर्चा करते हैं और जैसे ही किसी मरीज के स्वस्थ होने की खबर उन्हें मिलती है, तो ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।


बेहद शांत, सरल और अल्पभाषी डाॅ. महंत की शुचिता ही थी, जो उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी की घोषणा के बाद केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार आते ही रायपुर में एम्स अस्पताल के निर्माण को गति दिलाई। आज यदि कोरोना का हर मरीज स्वस्थ होकर सुरक्षित अपने घर लौट रहा है, तो रायपुर एम्स के प्रबंधन की बदौलत ही संभव हो पा रहा है।
एम्स रायपुर के डाॅक्टरों और पूरे स्टाॅफ के दिन-रात की मेहनत की सराहना करने से भी डाॅ. महंत नहीं थकते। वे मानते हैं कि आज छग इस महामारी से यदि पूरी सक्षमता से लड़ रहा है, तो इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हैं, जो दिन-रात अपने प्रशासनिक अधिकारियों और डाॅक्टरों की हौसला अफजाई कर रहे हैं। अस्पताल में चैबीसों घंटा तैनात प्रत्येक स्टाॅफ की काम को सराहना करते हुए उनके आत्मविश्वास को बढ़ा रहे हैं। इस वजह से कोरोना जैसी महामारी भी छग में वैसा असर नहीं दिखा पाई, जैसा तांडव उसने देश के दूसरे हिस्सों में किया है।

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