छत्तीसगढ़ का प्रयागराज और त्रिवेणी संगम राजिम की पहचान पहले से ही आस्था ,धर्म और संस्कृति  नगरी के रूप में स्थापित हैं। राजिम नगरी की  धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यता है। अब छत्तीसगढ़ शासन ने इसे और भी विकसित करने का निर्णय लिया है। शासन द्वारा  राज्य के जिन स्थलों से श्रीराम वन गमन किये थे, उन्हें चिन्हांकित किया गया है। इनमें गरियाबंद जिले के प्रमुख तीर्थस्थल राजिम भी शामिल है। राम वन गमन के दौरान श्रीराम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ लोमश ऋषि आश्रम में ठहरे थे। साथ ही पंचकोशी धाम के स्थलों से भी वे गुजरे थे। अब राज्य सरकार इन स्थलों को राम वन गमन पर्यटक परिपथ के रूप में विकसित करने जा रही हैं।
श्रीराम वन पथ गमन को विकसित करने के लिए शासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी सिलसिले में छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी  मंडल की अगुवाई में राज्य के मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी तथा पर्यटन सचिव पी अलबंगन ने राजिम का दौरा किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने भगवान राजीव लोचन में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। इस दौरान अधिकारियों ने राजिम में उन स्थलों को चिन्हित करते हुए जिले के आला अधिकारियों कलेक्टर श्याम धावडे, एसपी एम आर आहिरे, जिला पंचायत सीईओ विनय लंगेह एवं वनमण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल के साथ विस्तार से चर्चा की। चर्चा में कुलेश्वर मंदिर और राजीव लोचन मंदिर तथा लोमस ऋषि आश्रम के सौंदर्यकरण, वहां जरूरी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। चर्चा के दौरान 25 किलोमीटर परिधि के अंतर्गत पंचकोशी धाम यात्रा के प्रमुख स्थलों में मार्गो में संकेतांक और मूलभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, यात्री प्रतीक्षालय, पर्यटन सुविधा केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा की गई ।