कंसोल ग्रुप ऑफ कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी दर्ज….. जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों पर भी गिरी आर्थिक अपराध की गाज…. कई राजनेताओं के नाम भी होंगे उजागर….

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए पीआर कंपनी कंसोल को नाजायज फायदा पहुंचाना, जनसंपर्क अधिकारियों को काफी महंगा पड़ गया है। आर्थिक अपराध अण्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लू) ने कंसोल और जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही करोड़ों रूपए के गबन मामले में कई नामचीन राजनीतिक हस्तियों के भी नाम उजागर होने के संकेत ईओडब्लू से मिले हैं।
छत्तीसगढ़ की पीआर की फेमस कंपनी कंसोल और जनसंपर्क अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के पीछे मूल वजह बगैर काम किए करोड़ों रूपए डकारना है। इनके द्वारा एल-1, एल-2 कंपनियों को पेमेंट तो दूर काम तक नहीं सौंपा गया। साल 2016 से 2018 के बीच केवल कंसोल को ही संवाद से पेमेंट किया गया। आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग (ईओडब्ल्यू) में दर्ज केस के मुताबिक जनसंपर्क अधिकारियों ने 2016-2018 के बीच सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए टेंडर किया, पर ठेके की शर्तों में बदलाव कर कंसोल ग्रुप को करोड़ों का फायदा पहुंचाया। इस कार्रवाई को भी पिछली सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला माना जा रहा है।
कंसोल ग्रुप पर तत्कालीन प्रभावशाली राजनेताओं से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं। एफआईआर में फिलहाल बतौर आरोपी किसी व्यक्ति के बजाय कंसोल का ही नाम है। कंसोल नहीं आया तो टेंडर तक रद्द कर दिया गया। एफआईआर के अनुसार 2016 में जनसंपर्क से सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए तीन तरह के टेंडर निकले। बल्क एमएमएस, वाइस कॉल और एसमएस के माध्यम से प्रचार। टेंडर खुलने पर कंसोल ग्रुप एल-3 था, अर्थात दो और समूहों ने उससे कम रेट पर टेंडर डाला। जनसंपर्क ने टेंडर खुलने के बाद इसमें शामिल होने वाली तीनों कंपनियों को विकल्प दिया कि वे तीनों एल-1 की दर से प्रचार प्रसार करें, तीनों राजी हो गईं। जांच में खुलासा हुआ है कि जनसंपर्क अधिकारियों ने केवल कंसोल को ही काम सौंपा और करीब 2 करोड़ 51 लाख का भुगतान किया। 2017 में एसएमएस से प्रचार के लिए टेंडर निकला। इस बार कंसोल ने हिस्सा ही नहीं लिया। अधिकारियों ने टेंडर खुलने के बाद उसे निरस्त कर दिया। फिर नए सिरे से टेंडर निकला, इस बार सिर्फ कंसोल ने टेंडर जमा किया। इकलौता टेंडर होने के बावजूद कंसोल को टेंडर दे दिया गया। जांच में पता चला कंसोल को जिस दर पर ठेका मिला, उससे कम पर दूसरी कंपनी तैयार थी। फिर भी कंसोल को करीब 2 करोड़ का भुगतान हुआ। ईओडब्ल्यू अब यह जांच कर रही है कि इस घोटाले में कौन-कौन जिम्मेदार शामिल हैं।

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