भोले को जल चढाने प्रदेश भर में लगा भक्तों का तांता

रायपुर। पवित्र सावन महीने के अंतिम सोमवार को प्रदेश भर में भोले के भक्तों में आस्था देखने को मिली। भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया।  हमारे संवाददाताओं ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों से जलाभिषेक के समाचार संकलित किये।

आइये जानते है कहाँ कहाँ हुई शिवजी की विशेष पूजा अर्चना –

रायपुर। हर साल श्रावण मास में कावड़िये शिव भक्ति में लीन होकर और बम भोले के जयकारे के साथ कांवड़ यात्रा निकालते है। प्राचीन हटकेश्वरनाथ मंदिर में कल रात्रि से ही भोले के भक्तों का तांता लगने लगा। राजधानी के समता कॉलोनी से महादेव घाट के लिए भी कावड़ यात्रा निकाली गई है। इस कावड़ यात्रा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, विधायक विकास उपाध्याय, अन्य कांग्रेसी नेता समेत हजारों की संख्या में कवड़िये शामिल हुए हैं। कांवड़ यात्रा निकालने से पहले मुख्यमंत्री ने पूरे विधि विधान से पूजा पाठ भी की। (रिपोर्ट-बृज साहू )

अभनपुर। ग्राम चंपारण के चम्पेश्वर महादेव मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार के चलते कांवरियों के साथ श्रद्धालुओ की सैकड़ो की तादात में भीड़ उमड़ी वही चम्पारण के चम्पेश्वर महादेव के ट्र्स्ट द्वारा भी प्रत्येक सोमवार को आने वाले कांवरियों व दूर दराज से आने वालों के लिए निःशुल्क भोजन व्यवस्था रखी गई थी। चम्पेश्वर महादेव ट्र्स्ट के अध्यक्ष नान्हू साहू ने बताया कि चम्पेश्वर महादेव स्वयंभू  है साथ ही शिव जी त्रिमूर्ति है जिसमे पार्वती, शंकर,और गणेश जी है जो हजारों वर्ष से यहां है और इसका इतिहास भी है कि वल्लभ सम्प्रदाय का प्रचारक वल्लभाचार्य जी का जन्म स्थली से खासा सम्बन्ध है वल्लभाचार्य जी के पिता लक्ष्मण भठ्ठ और माता जी यहां शिवजी का दर्शन करने आये थे और लक्ष्मण भठ्ठ की पत्नी मतलब वल्लभाचार्य जी की माँ गर्भवती थी पर यहां वल्लभाचार्य जी का जन्म हुआ जो देश विदेश में वैष्णव सम्प्रदाय का धर्म प्रचारक बने और जो वैष्णवी आते है जो पहले शिवजी का दर्शन करने पश्चात ही वल्लभाचार्य मंदिर का दर्शन करते है साथ ही भोग भी पहले शिव जी को लगाने के पश्चात ही वल्लभाचार्य मंदिर में लगाया है। कहा गया है  जिनके  दर्शन करने दूरदराज से लोग यहाँ आते हैं इस मंदिर के इतिहास में कहा गया है कि यहां जो मनोकामना लेकर आते है उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होते है।(रिपोर्ट -दीपक वर्मा)

थान खम्हरिया। सावन माह में आखिरी सोमवार को जल अपर्ण करने थान खम्हरिया से हज़ारों  की संख्या में श्रद्धालुओं का जत्था भोरमदेव रवाना हुआ ।अंचल में अच्छी बारिश और सुख समृधि के लिए जिले के थान खम्हरिया में विगत 7 वर्षो से समाजसेवी बसंत अग्रवाल के अगुवाई में हज़ारो की संख्या में श्रद्धालुओ का जत्था भोरमदेव जाता है और यह काँवर यात्रा धीरे धीरे वृहद रूप ले रहा है जिसमें आस पास के 10 गांव के लोग जिसमें लगभग 10 हज़ार लोग शामिल होते है । समाजसेवी बसंत अग्रवाल ने बताया कि यह धार्मिक यात्रा है मैं धर्म के माध्यम से आगे बढ़ना चाहता हूँ सामजिक  काँवर यात्रा में मुझे अपार सहयोग मिल रहा है यह यात्रा पूरे छत्तीसगढ़ ही नही पूरे मध्य भारत की शान है।(रिपोर्ट -हिमाचल शर्मा)

राजिम। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को महानदी मैया का जल श्री राजीव लोचन कुलेश्वरनाथ बोल बम कांवरियां संघ के द्वारा राजिम अंचलवासी के सहयोग से मानवश्रिंखला बना कर महानदी का जल नदी के तट से बाल्टी मे जल भर कर के एक दुसरे के हाथ से आदान-प्रदान कर हर्षोल्लस के साथ देवा दी देव महादेव बाबा गरिबनाथ जी मे सहस्त्रार्ध जलाभिषेक किया।   साथ ही साथ आयोजन को भव्य रुप देने के लिए छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक दिलीप षड़ंगी के भक्तिमय गीतों  से पुरे नगरवासी और बहार से आए दर्शनार्थीयो ने इस भक्ति संगीतमय पल का आनंद उठाया।(रिपोर्ट -नागेंद्र निषाद)

कोटनी।  सावन के अंतिम सोमवार मे शिव भक्तो का रैला कोटनी एनीकेट के पार स्थित शिवालय मे जल चढाने के लिए हज़ारों कावड़िए नदी के इस पार से उस पार जाने के लिए बेताब है।शिवनाथ नदी का जल एनीकेट के लगभग दो फुट ऊपर से बह रहा है।प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की व्यवस्था नही की गई है। यदि कोई दुर्घटना  घटित होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ? कारण पिछले दो घंटे के अंतराल मे लगभग एक फुट पानी कि बहाव बढा है।(रिपोर्ट-संतोष तिवारी)

कांकेर। सावन माह में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक को लेकर जगह – जगह कांवड़ यात्राओं का दौर जारी हैं। तो वहीं कांकेर शहर के ऊपर नीचे रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर समिति द्वारा भव्य कांवड़ यात्रा निकाली गई।कांवड़ यात्रा शहर से 7 किमी दूर सरंगपाल स्थित महानदी त्रिवेणी संगम से प्राचीन शिव मंदिर के लिए रवाना हुई।  जहाँ पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा पंडरीपानी, अन्नपूर्णा पारा, सेन चौक से होते हुए नगर के मुख्य मार्ग से होकर ऊपर – नीचे रोड शिव मंदिर तक पहुंची। जहां कांवड़ियाें ने महानदी से लाए जल से भोलेनाथ के प्रतिक शिवलिंग का अभिषेक किया।
इस दौरान कांवड़ यात्रा में एक कांवड़िया कांवड़ के साज सज्जा मे सजाये राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लिए दिखाई दिया। जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ था और साथ ही लोग इस कांवड़िए की शिवभक्ति और राष्ट्रभक्ति की जमकर प्रशंसा करते नजर आए।वहीं मंदिर समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि निरंतर 12 वर्षों से कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। और विभिन्न संगठनों तथा समाजों द्वारा कांवरियों का रास्तेभर स्वागत किया गया। मंदिर समिति द्वारा मंदिर परिसर में सभी कांवरियों के लिए सब्जी-पूड़ी तथा हलवा प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। (रिपोर्ट-मिथुन मंडल)

कुलेश्वर नाथ राजिम । छत्तीसगढ़ का सुप्रसिद्घ देवालय लोगों का आस्था और भक्ती का स्थल है जो  तीनों नदी पैरी, सोडुर, महानदी त्रिवेणी संगम के मध्य नदी के तल से बीस फ़िट ऊचाई पर स्थित  भगवान कुलेश्वर नाथ का मंदिर है जहाँ श्रावण मास के अंतिम सोमवार को श्रध्दालू आज प्रातः चार बजे मंदिर का द्वार खुलते ही जलाभिषेक करने पहुचे।  कुलेश्वर नाथ महादेव को  सीता माता के हाथ से निर्मित किया गया था और मंदिर में आज भी आप देख सकते हैं की सीता माता के हाथ के पांचों  उंगली के निशान  पिण्ड के रुप मे मौजूद हैं।(रिपोर्ट -नागेंद्र निषाद)

 

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