रायपुर। कोरोना संक्रमण काल में गरीब, बेसहारों और भूखों के लिए राजधानी के सभी गुरुद्वारा प्रबंधनों ने रसोईयां खोल दी थी। इन रसोईयों में भोजन बनाने वाले और परोसने वाले सभी सिक्ख धर्मावालम्बी ही थे। कोविड 19 कोरोना वायरस जैसी महामारी और लॉक डाउन के दौरान भूख से जूझ रहे लोगों तक दोनो टाइम भोजन और सूखा राशन पहुंचाने की सेवा करने वाली सभी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों को सिक्ख समाज छत्तीसगढ़ ने सिक्ख धर्म के सर्वोच्च सम्मान सिरोपा और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमेन महेंद्र सिंह छाबड़ा ने अपने उदबोधन में कहा कि लोंगों को खाना मिल गया, और सिक्खों को सेवा का बहाना मिल गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आह्वान कि प्रदेश में कोई भूखा नही सोएगा, उनके उक्त कथन को शिरोधार्य मानते हुए छत्तीसगढ़ की सभी गुरुद्वारा कमेटियों से आग्रह कर लगातार आज तक जरूरत मन्दो को लंगर सेवा की गई।
सिक्ख समाज छत्तीसगढ़ के संयोजक सुरेंद्र सिंह छाबड़ा ने कहा कि सेवा करत होवे निहकामी, तिसको होत परापत स्वामी अर्थात जो लोग निःस्वार्थ भाव से सेवा करते है उनके अंदर वाहेगुरु बसता है। सिक्ख समाज छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रभारी गुरमीत सिंह गुरदत्ता ने बताया कि सिक्ख समाज छत्तीसगढ़ ने गुरुद्वारा गोबिंद नगर, गुरुद्वारा मोवा, गुरुद्वारा महावीर नगर, गुरुद्वारा टाटीबंध, गुरुद्वारा हीरापुर, गुरुद्वारा रावाँभाटा और छत्तीसगढ़ सिक्ख संगठन के पदाधिकारियों को कोरोना महामारी के भयावह संकट में अपनी निःस्वार्थ और निःशुल्क भोजन सेवा के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह छाबड़ा, महेंद्र सिंह छाबड़ा, निरंजन सिंह खनूजा, इंदरजीत सिंह छाबड़ा (सीनियर), इंदरजीत सिह छाबड़ा (जूनियर), गुरमीत सिंह गुरदत्ता, तेजिंदर सिह होरा, मंजीत सिंह सलूजा, सतपाल सिंह खनूजा, बलविंदर सिंह अरोरा, हरकिशन सिह राजपूत विशेष रूप से उपस्थित थे।