दीवार तोड़कर बस्ती में घुसा हाथी, कॉलर आईडी-घंटी के बीच झूल रहे अफसर

अंबिकापुर/जशपुर। सरगुजा और जशपुर के ग्रामीण इलाके में उत्पाती हाथियों का उत्पात जारी है। जशपुर शहर के कई मोहल्लों में रात भर दंतैला  हाथी रविवार रात करीब दो बजे जिला मुख्यालय के कॉलेज रोड तेली टोली हिस्से से बस्ती में प्रवेश कर गया। इसके बाद कुछ घराे के दीवारों को तोड़ता हुआ वह नगर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करता हुआ वापस चला गया। देर रात कुछ लोग इधर-उधर भागते रहे। जिससे लोगो के मन में दहशत फैला हुआ है।

आपको बता दे कि उत्पाती हाथियों की लोकेशन को ट्रेस करने के लिए हाथी के गले मे रेडियो कॉलर बांधने की योजना बनाई गई है। जिसे पूर्व सीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने इस योजना को कथित तौर पर मांगा। लेकिन इसे व्यावहारिक फिजूलखर्ची बता कर इस पर रोक लगा दिया गया था।  तब हाथी प्रभावित क्षेत्र के लोगो ने सलाह दिया कि हाथियों के गले में घंटिया लगाई जाए। जिससे हमें  पता चल सकेगा कि हाथी कहा है? लेकिन हाथियों के गले में घंटी लगाने वाली योजना असफल रही। हाथी एक्सपर्ट ने रेडियो कॉलर की बजाय घंटियों को बांधना अव्यावहारिक बताया तब इस घंटियों को विभाग के माल खाने में जमा कर दिया गया।

अब बेकार पड़ी ये घंटियां मंदिरो में  दान करने की बात कही जा रही है।  लेकिन विभाग अब वापस कॉलर आईडी की योजना पर काम करन शुरू कर  दिया  है। 100 से भी अधिक जंगली हाथियों पर नजर रखने के लिए पूर्व सीसीएफ केके बिसेन की पहल पर एक लाख रूपए की लागत वाले रेडियो कॉलर लगाने की शुरुआत की गई है।  लेकिन यह कॉलर आईडी लगाने की योजना भी सार्थक नजर नही आ रही है।  आज भी हाथी रिहायशी इलाकों में घुसकर ग्रामीणों और घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।  ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि वन विभाग हाथियों के ऊपर किस तरह पानी की तरह रुपये बहा रहा है।

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