प्रदेश में जल्द शुरू होने जा रही मंकी पॉक्स की जांच, NCDC ने सरकारी मेडिकल कॉलेज से मांगे प्रस्ताव

 

Monkey pox investigation going to start soon in the state; भोपाल : देश में बढ़ रहे मंकीपॉक्स के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। आपको बता दें कि मंकीपॉक्स का पहला मामला केरल में मिला था जिसके बाद धीरे धीरे इस बीमारी ने लोगों को अपना शिकार बनाना चालू किया ,अभी तक इस बीमारी की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। जिसको देखते हुए अब नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने प्रदेश में मंकी पॉक्स न बढे़ इसके लिए (NCDC) ने मध्यप्रदेश के कुछ कॉलेजों का चयन किया है जिसमे मंकीपॉक्स की जांच कि जा सके। इसके लिए प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर शहर को चुना गया है.

इंदौर, भोपाल और जबलपुर में शुरू होगी मंकीपॉक्स की जांच

Monkey pox investigation going to start soon in the state; इसके लिए महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (एमजीएम) लैब सहित प्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मंकीपॉक्स और अन्य पशुजन्य संक्रामक रोगों की जांच जल्द ही शुरू होगी। इसके लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने पशुजन्य रोगों के निदान, जांच के लिए मध्य प्रदेश के कुछ कॉलेजों को चुना गया है। इसका उद्देश्य पशुजन्य रोगों की निगरानी, निदान और जांच की व्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है। एनसीडीसी पूरे देश में मेडिकल कॉलेजों को चिह्नित कर रहा है, जहां पशुजन्य रोगों की जांच की व्यवस्था की जा सके। पहले चरण में प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेजों का चयन हुआ है। इंदौर के अलावा दो मेडिकल कॉलेज में जबलपुर और भोपाल के हैं.

क्या होते हैं पशुजन्य रोग

Monkey pox investigation going to start soon in the state: जो बीमारियां जानवरों से मनुष्यों में फैलती हैं उन्हें पशुजन्य रोग कहा जाता है। अब तक 60 से ज्यादा ऐसी बीमारियों को पता लगाया जा चुका है। पशुजन्य बीमारियों को फैलाने में घरेलू और जंगली जानवर दोनों शामिल हो सकते हैं। 70 प्रतिशत से ज्यादा पशुजन्य रोग जंगली जानवरों से फैलते हैं। पशुजन्य रोगों के बढ़ने की एक बड़ी वजह तेजी से बढ़ रहा शहरीकरण भी है। पशुजन्य रोग हवा, संक्रमित पदार्थों, खाद्य पदार्थों या शरीर के तरल पदार्थों (जैसे लार, रक्त, पेशाब, मल आदि) के जरिए सीधे मनुष्यों में फैलते हैं।