आज के वक़्त मई सब पर यूट्यूब का भूत सवार है। जब देखो वो फोन पर नजरें गड़ाए वीडियो ( video)देख रहे हैं।

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ये ही नहीं सिर्फ वीडियो ( video)देखकर खुद पर नुस्खा नहीं आजमां रहे हैं बल्कि परिवार के दूसरे लोगों को फारवर्ड कर खुद को ज्ञानी भी बता रहे हैं।

कहीं आप भी तो नही करते ये काम

मेरे हेलो बोलते ही वे सामने से बोल पड़े- तुम्हें एसिडिटी की प्रॉब्लम है न, मैंने एक उपाय भेजा था, उसे क्यों नहीं ट्राई किया?उनके यूट्यबिया ज्ञान का सुख परिवार का हर सदस्य ‘भोग’ रहा है। भोग का मतलब समझ रहे हैं न आप। एक बार बुखार के लिए मौसी को पता नहीं कौन सी दवाई बनाकर दे दी कि मौसी की हालत ही गंभीर हो गई।

यूट्यूब से इलाज ढूंढने के बाद लोग ये करते हैं

 

छोटी-मोटी दवाइयां लेते हैं।

बेफिजूल के सवाल करते हैं।

जिद करके टेस्ट भी करवाते हैं।

खुद को दवाइयों का विशेषज्ञ मानने लगते हैं।

कुछ लोग सीधे कह देते हैं कि हमें कैंसर हो गया है।

इंटरनेट के आधार पर फैसला न लें

भरोसे के साथ डॉक्टर के पास जाइए। जब आप डॉक्टर पर भरोसा दिखाएंगे, तभी इलाज भी हो पाएगा। आप दूसरे डॉक्टर की सलाह ले लीजिए, लेकिन इंटरनेट( internet) के आधार पर फैसला न लें।