गरियाबन्द- बेटे के पाँव का दर्द लाचार पिता के बारदस्त के बाहर गरियाबंद ज़िला मुख्यालय से 127km दूर देवभोग ब्लॉक के झराबहाल के गरीब परिवार पर टूटा आफत का पहाड़,इलाज के अभाव में बीमार से बड़े बेटे की मौत तो सड़क दुर्घटना में घायल छोटे बेटे के पांव काटने पड़े।मुश्किल से गुजारा के बीच बेटे का इलाज करवा रहा परिवार, हालात ऐसे भी बनते है कभी कभी की महंगे दवा के अभाव दारू पिलाकर दर्द दूर करते है बेटे का।

देवभोग ब्लॉक के झराबहाल में रहने वाले गरीब मायाराम यादव को वर्ष 2022 कभी न भूल पाने वाला दर्द दे गया है,शादी शुदा दोनों बेटे हमाली व मजदूरी कर परिवार चला रहे थे,लेकिन छोटे बेटे टंकधर 31 वर्ष का 20 सितम्बर 2022 को नेशनल हाइवे पर लापरवाही पूर्वक बाइक चला रहे डोहेल निवासी यूवक ने टक्कर मार दिया।जबरदस्त टक्कर में पैर के नश कट गए थे उसके पांव काटना पड़ा,इस बीच बड़ा बेटा राजेश 32 वर्ष भी बीमार पड़ा,गरियाबन्द जिला अस्पताल में इलाज भी चला,आधा अधूरा इलाज करा कर राजेश घर लौट आया,09 दिसम्बर 2022 को उसकी मौत हो गई।कमाने वाले दो जवान बेटे के साथ घटी घटना से परिवार अब संकट में आ गया है।

सोना चांदी बिके कर्जा चुका रहा है बाप-मायाराम ने बताया कि घटना के बाद छोटे बेटे को देवभोग अस्पताल ने रेफर कर दिया, एम्स पहूचे तो वँहा इलाज कराने वालों की कतार लगी थी,प्रबंधन ने 6 दिन की वेटिंग बताया,इधर पांव का इन्फेक्शन बढ़ रहा था,बात घायल बेटे की जिंदगी व मौत के बीच आकर अटक गई।मजबूर परिवार ने राजधानी के एक निजी अस्पताल में बेटे का इलाज कराया फैल चुके इंफेक्शन के कारण दाहिना पांव काटना पड़ा।लगभग ढाई लाख खर्च हुए।जिसकी भरपाई घर मे रखे सोने चांदी बेचने के अलावा घर मे मौजूद जमीन के 60 डिश्मिल टूकड़े को गिरवी रखने के अलावा परिजनों के मदद से की गई।अब बूढ़े माँ बाप उसकी जतन कर रहे है।बड़े बेटे की मौत छोटे बेटे के पांव काटने के बाद बड़ी बहू,दो पोते, पत्नी की परवरिश का जिम्मा बूढे कंधे पर आंन पड़ा है ।अज्ञानता वश परिवार सरकारी योजनाओं से नही जुड़ पाया।परिवार के पास न तो आयुष्मान कार्ड है न कोई पेंशन योजना।गरीबी रेखा कार्ड से मिलने वाला चावल व महिलाओं की मजदूरी ही सहारा है।

हर एक दिन बाद 600 का खर्च, कर्ज पर निर्भर है उपचार- पांव काटने के बाद उसके घाव को सुखाने,दर्द कम करने व ड्रेसिंग हर एक दिन बाद करना है।इस मुकाम तक आने के बाद भी परिवार को सरकारी योजना का लाभ नही मिला।घटना से प्रसाशन भी इत्तेफाक रखता है पर सरकारी योजना से जुड़े उसकी पहल ग्राम स्तर पर तैनात किसी भी जिम्मेदार ने नही किया।परिवार एक निजी चिकित्सक की मदद से ड्रैसिंग करवा रहा है।पीडित का चाचा परमानन्द यादव ने बताया कि हर दूसरे दिन 600 का खर्च है।जब तक हिम्मत हुई परिवार खर्च करता रहा,इलाज करने वाले ने भी अपने क्रेडिट में दवा दिलवा कर मदद कर रहा है।कर्ज बढ़ गया है तो कभी कभी एक सप्ताह भी गेप करना पड़ रहा है।दर्द असहनीय हों जाने पर दवा के अभाव में उसे शराब देना पड़ता है,ताकि उसे नींद आ सके।