रायपुर । भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहां की करीब 60 फीसदी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधा खेती-किसानी से जुड़ी हुई है. यहां न जाने कितने प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं, जो देश के साथ-साथ दुनियाभर की खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान दे रही हैं. सबसे ज्यादा उत्पादन गेहूं और चावल का मिल रहा है.।छत्तीसगढ़ की संस्कृति पूरी तरह से चावल पर आधारित है. राज्य में लगभग हर आयोजन में चावल को प्रमुखता से शामिल किया जाता है. यह सिर्फ एक प्रमुख चावल उत्पादक राज्य ही नहीं है, बल्कि यहां चावल खाने वालों की तादात भी कहीं ज्यादा है।

छत्तीसगढ़ के ‘धान का कटोरा’ कहे जाने का प्रमुख कारण है कि यहां क्षेत्रफल की तुलना में अत्याधिक किस्मों का धान उगाया जाता है. अकेले इस राज्य में धान की 20,000 से अधिक किस्मों का उत्पादन होता है, जिसमें सबसे ज्यादा मशहूर हैं धान की औषधीय किस्में, जिनका इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में होता है। वैसे तो छत्तीसगढ़ का करीब 88 फीसदी हिस्सा धान की फसल से कवर होता है, लेकिन धान की सबसे ज्यादा किस्मों का उत्पादन या कहें कि धान उत्पादन में विविधता के चलते छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है

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#CGHankey ने रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित सी-मार्ट में खरीदारी की जो ग्रामीण उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय उत्पाद और हस्तशिल्प बेचने के लिए बाज़ार प्रदान करता है। वे बोलते है चावल की कुछ स्वदेशी किस्मों को प्राप्त किए बिना “भारत के चावल के कटोरे” की यात्रा नहीं की जा सकती।