भाटापारा- कड़ाई नहीं, ढिलाई। लिहाजा खूब फल-फूल रहा है क्रिकेट सट्टा। नाम कमा रहा है,अपना शहर इस काम में। इसलिए करीब के शहर ही नहीं, सीमावर्ती प्रांतों से भी शौकीन पहुंच रहे हैं और दांव में लग रही है लाखों की रकम।, जी हाँ भाटापारा शहर है, जिसकी पहचान ऐसे शहर के रूप में होती है, जहां बेरोक-टोक अवैध काम किये जा सकते हैं। ऐसे में क्रिकेट सट्टा, खूब खेला जा रहा है। निगरानी और कार्रवाई करने वाले हाथों ने जैसी दूरी बनाई हुई है, इसके चर्चे खूब हो रहे हैं।

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शहर की घनी आबादी के बीच ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां यह अवैध काम हो रहा है। साथ ही शहर से लगे आउटर एरिया भी नए पनाहगाह बन चुके हैं। हमेशा से चर्चित रहने वाला पुराना ठिकाना सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, जिसकी जानकारी जिम्मेदारों को भी हैं।

इनके लिए बेहद मुफीद

मुंगेली, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग के क्रिकेट सट्टा प्रेमी तो आ ही रहे हैं, अब सीमावर्ती प्रांत महाराष्ट्र से भी आने की खबरें मिल रहीं हैं। यह इसलिए क्योंकि कड़ाई, केवल दिखावे के लिए होती है, और ढिलाई पूरी तरह बरती जाती है। एक तरह से छूट दी जा रही है इस काम की।

नया बहाना
आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है। धारा 144 भी लागू की जा चुकी है। ऐसे में जिम्मेदारों का कहना है कि पूरा ध्यान आचार संहिता के नियमों के परिपालन पर है। “देखते हैं या ध्यान में है” जैसे सदाबहार शब्द अभी भी दोहराए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेकार की ही कवायद होगी।