रायपुर। अपने और अपनों के लिए हर कोई जीता है, पर असल जिंदादिली तो वही है, जब इंसान खुद की परवाह करना छोड़कर मुसीबत के समय और की मदद के लिए खुद को झोंक देता है। ’आशा की किरण’ एक ऐसी संस्था है, जिसमें ऐसे ही जिंदादिल इंसानों की पूरी एक फौज है, जो मुसीबत में पड़े लोगों की मदद करने के लिए हर एक पल तैयार रहते हैं।

कोरोना वायरस की वजह से इस वक्त ना केवल राजधानी, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में परिस्थितियां प्रतिकूल हैं। सरकार लगातार कोशिश में जुटी हुई है कि हालात नियंत्रण में रहे, जिसके चलते बंदिशों और सख्ती का दौर जारी है। स्वाभाविक है कि जहां सरकारी बंदिशें हैं, तो लोगों का काम, व्यापार सहित रोजमर्रा की जरुरतों और प्रतिपूर्तियों के साधन पर भी ताला लग चुका है। इन परिस्थितियों में आखिर रोज कमाने और खाने वाले आखिर अपने और परिवार के लिए भोजन जुटाएं भी तो कैसे, पर इसकी चिंता उन्हें नहीं करनी पड़ रही है, यह भारत की संस्कृति का उजला उदाहरण है।

सुबह होने से रात ढ़लने तक इसकी चिंता इंसानियत के फरिश्तें कर रहे हैं। केवल चिंता नहीं, बल्कि तमाम मेहनत भी ऐसे ही लोग कर रहें हैं, जिसमें राजधानी की स्वयं सेवी संस्थान ’आशा की किरण’ के किशोर खेतपाल, अशोक खूबचंदानी, जीतू खनूजा जैसे लोगों का नाम शामिल है। मानवता की रक्षा करने वाले राजधानी के ऐसी प्रतिमूर्तियां हैं, जो अपना नाम सामने नहीं लाना चाहते, लेकिन गरीब, बेबस और पीड़ित लोगों के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने के लिए एक पैर पर तैयार हैं।

मुश्किलात के इस दौर में ’ग्रेंड न्यूज’ ने जब इनसे बातचीत की, तो पहला आग्रह यही रहा कि साहब नाम नहीं, काम चाहिए। यह बताइए कि आपके पास कितने जरुरतमंद हैं, जिनके लिए राशन की तत्काल व्यवस्था करनी है। बातों का जब सिलसिला चला, तो बात सामने आई कि राजधानी में प्रतिदिन औसतन 500 परिवारों को सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि तात्कालिक व्यवस्था के लिए तैयार भोजन भी दिया जाता है, लेकिन सूखा राशन पहुंचाने के पीछे उद्देश्य, कम से कम एक सप्ताह के लिए गरीब भाईयों का परिवार निश्चिंत हो जाए।

बहरहाल ’आशा की किरण’ सिर्फ नाम की नहीं, बल्कि नाम के अनुरूप ही काम करती है, यह इस मुश्किल दौर में साबित हो गया है। विगत 14 दिनों से यह संस्था बगैर खर्च की चिंता किए सिर्फ गरीबों की मदद के लिए लगातार दौड़ लगा रही हैं। इस संस्था में शामिल कर कोई खुद को केवल कार्यकर्ता मानता है, और मजबूर लोगों को मदद करना ही एक मात्र मकसद समझता है।