दिल्ली (delhi )की लेखिका गीतांजलि श्री देश की पहली महिला लेखक बन गई हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज जीता है। उनका उपन्यास रेट समाधि जिसे अंग्रेजी में टूंब ऑफ सैंड के नाम से डेसी रॉकवेल ने ट्रांसलेट किया है उसे बुकर प्राइज(book prize ) से नवाजा गया है। बता दें कि यह पहली हिंदी भाषी किताब है जिसे इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है

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आपको बता दे कि  इस उपन्यास में 80 साल की बुजुर्ग विधवा की कहानी है, जो 1947 में भारत और पाकिस्तान (pakistan )के विभाजन के बाद अपने पति को खो देती है। इसके बाद वह गहरे अवसाद में चली जाती है।  काफी जद्दोजहद के बाद वह अपने अवसाद पर काबू पाती है और विभाजन के दौरान पीछे छूटे अतीत का सामना करने के लिए पाकिस्तान(pakistan ) जाने का फैसला करती है।  राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ‘रेत समाधि’ हिंदी की पहली ऐसी किताब है जिसने न केवल अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार(award) की लॉन्गलिस्ट(longlis t ) और शॉर्टलिस्ट(shortlist ) में जगह बनायी बल्कि गुरुवार की रात, लंदन में हुए समारोह में ये सम्मान अपने नाम भी किया। 

जानें कौन हैं गीतांजलि श्री

देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन करने वाली गीतांजलि श्री उत्तर प्रदेश(uttarpradesh ) के मैनपुरी(mainpuri ) से तालुक्क रखती हैं।  लेखिका ने तीन उपन्यास और कई कथा संग्रह को लिखा है।  यही नहीं गीतांजलि(gitanjali ) श्री की हिंदी कृतियों का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियन और कोरियन भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है।